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Tribunal: युवती को दिया 17 लाख रुपये का मुआवजा, 2018 में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से हुई थी घायल
Thu, 07 Mar 2024 03:03 PM IST
अमर शर्मा
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 07 Mar 2024 03:03 PM IST
सार
महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने एक लड़की को 17 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। जो 2018 में अपने पिता के दोपहिया वाहन पर पीछे बैठी थी, और तब एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
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सड़क हादसा (सांकेतिक फोटो)
- फोटो : ANI
विस्तार
महाराष्ट्र के ठाणे में मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने एक लड़की को 17 लाख रुपये का मुआवजा दिया है। जो 2018 में अपने पिता के दोपहिया वाहन पर पीछे बैठी थी, और तब एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थी।
पीड़िता एक एचएससी (कक्षा 12) की छात्रा थी और उस समय 18 वर्ष की थी, जब दुर्घटना हुई थी। जिसकी वजह से उसकी एक उंगली कट गई, जिससे उसे रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। ट्रिब्यूनल को यह जानकारी दी गई।
ट्रिब्यूनल अध्यक्ष और जिला न्यायाधीश एस बी अग्रवाल ने 15 फरवरी को पारित आदेश में ट्रक के मालिक और बीमाकर्ता को, दावा दायर करने की तारीख से 7.50 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ उसे मुआवजा देने का निर्देश दिया।
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बीमा कंपनी, एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने विभिन्न आधारों पर दावे का विरोध किया। जबकि ट्रक का मालिक ट्रिब्यूनल की सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुआ और उसके खिलाफ एकपक्षीय फैसला सुनाया गया।
पीड़िता, सय्यद सोसुन हकीमा सय्यद मोहम्मद अली, ठाणे के मुंब्रा इलाके की कौसा की रहने वाली है। उन्होंने अपनी याचिका में ट्रिब्यूनल को बताया कि 24 नवंबर, 2018 को शाम करीब 7 बजे, जब वह अपने पिता के स्कूटर पर पीछे बैठी थीं। तभी पीछे से आ रहे ट्रक ने उनके वाहन को टक्कर मार दी, जिससे वह गिर गईं और उन्हें गंभीर चोटें आईं।
ट्रक को तेज और लापरवाही से चलाया जा रहा था और चालक ब्रेक लगाने में नाकाम रहा। जिसके कारण दुर्घटना हुई। पीड़िता ने कहा कि उन्हें गंभीर चोटें आईं और उन्हें 83 दिनों के लिए मुंबई के जे जे अस्पताल में भर्ती कराया गया। ट्रिब्यूनल को बताया गया कि उनके दाहिने हाथ की एक उंगली काट दी गई और उनकी कमर पर ग्रोइन फ्लैप सर्जरी की गई।
उन्होंने कहा कि जब दुर्घटना हुई थीं, तब वह 12वीं कक्षा की छात्रा थीं, जिसके कारण वह बाद में कॉलेज नहीं जा सकीं। उन्होंने कहा कि वह अपनी रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावी ढंग से करने में असमर्थ हैं। चूंकि उन्हें आगे के चिकित्सा के लिए पैसों की जरूरत है और उन्हें एक सहायक को नियुक्त करना होगा। इसलिए उन्होंने 56.26 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की।
साक्ष्य और गवाहों की गहन जांच के बाद, ट्रिब्यूनल ने हकीमा के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें उनके चिकित्सा खर्चों, भविष्य की आय के नुकसान, पीड़ा और दुख, और अन्य संबंधित लागतों के लिए 17,03,330 रुपये का मुआवजा दिया।
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पीड़िता एक एचएससी (कक्षा 12) की छात्रा थी और उस समय 18 वर्ष की थी, जब दुर्घटना हुई थी। जिसकी वजह से उसकी एक उंगली कट गई, जिससे उसे रोजमर्रा के काम करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा। ट्रिब्यूनल को यह जानकारी दी गई।
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ट्रिब्यूनल अध्यक्ष और जिला न्यायाधीश एस बी अग्रवाल ने 15 फरवरी को पारित आदेश में ट्रक के मालिक और बीमाकर्ता को, दावा दायर करने की तारीख से 7.50 प्रतिशत प्रति वर्ष ब्याज के साथ उसे मुआवजा देने का निर्देश दिया।
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बीमा कंपनी, एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने विभिन्न आधारों पर दावे का विरोध किया। जबकि ट्रक का मालिक ट्रिब्यूनल की सुनवाई के लिए उपस्थित नहीं हुआ और उसके खिलाफ एकपक्षीय फैसला सुनाया गया।
पीड़िता, सय्यद सोसुन हकीमा सय्यद मोहम्मद अली, ठाणे के मुंब्रा इलाके की कौसा की रहने वाली है। उन्होंने अपनी याचिका में ट्रिब्यूनल को बताया कि 24 नवंबर, 2018 को शाम करीब 7 बजे, जब वह अपने पिता के स्कूटर पर पीछे बैठी थीं। तभी पीछे से आ रहे ट्रक ने उनके वाहन को टक्कर मार दी, जिससे वह गिर गईं और उन्हें गंभीर चोटें आईं।
ट्रक को तेज और लापरवाही से चलाया जा रहा था और चालक ब्रेक लगाने में नाकाम रहा। जिसके कारण दुर्घटना हुई। पीड़िता ने कहा कि उन्हें गंभीर चोटें आईं और उन्हें 83 दिनों के लिए मुंबई के जे जे अस्पताल में भर्ती कराया गया। ट्रिब्यूनल को बताया गया कि उनके दाहिने हाथ की एक उंगली काट दी गई और उनकी कमर पर ग्रोइन फ्लैप सर्जरी की गई।
उन्होंने कहा कि जब दुर्घटना हुई थीं, तब वह 12वीं कक्षा की छात्रा थीं, जिसके कारण वह बाद में कॉलेज नहीं जा सकीं। उन्होंने कहा कि वह अपनी रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावी ढंग से करने में असमर्थ हैं। चूंकि उन्हें आगे के चिकित्सा के लिए पैसों की जरूरत है और उन्हें एक सहायक को नियुक्त करना होगा। इसलिए उन्होंने 56.26 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की।
साक्ष्य और गवाहों की गहन जांच के बाद, ट्रिब्यूनल ने हकीमा के पक्ष में फैसला सुनाया और उन्हें उनके चिकित्सा खर्चों, भविष्य की आय के नुकसान, पीड़ा और दुख, और अन्य संबंधित लागतों के लिए 17,03,330 रुपये का मुआवजा दिया।