PLI-Auto Scheme: पीएलआई-ऑटो योजना में महाराष्ट्र बना देश में नंबर-1, लगीं 66 नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स
भारत में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लागू की गई 'उत्पादन आधारित प्रोत्साहन' (PLI) योजना के तहत देश भर में विनिर्माण इकाइयां तेजी से स्थापित हो रही हैं। संसद के निचले सदन लोकसभा में भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, महाराष्ट्र देश में PLI-ऑटो योजना के तहत सबसे ज्यादा मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित करने वाला नंबर-वन राज्य बनकर उभरा है।
विस्तार
देश में ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स निर्माण को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI-Auto) योजना के तहत महाराष्ट्र सबसे आगे निकलकर सामने आया है। संसद में पेश किए गए आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक इस योजना के तहत महाराष्ट्र में सबसे अधिक 66 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित की जा चुकी हैं।
सरकार का कहना है कि इस योजना का मकसद केवल नए निवेश को आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि एडवांस्ड ऑटोमोटिव तकनीकों के घरेलू उत्पादन, रोजगार सृजन और स्थानीय विनिर्माण को भी बढ़ावा देना है।
देश भर में PLI-ऑटो योजना के तहत मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की राज्यवार स्थिति क्या है?
भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा लोकसभा में सांसदों के सवालों के जवाब में दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 31 मार्च 2026 तक देश भर में कुल 225 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स स्थापित की जा चुकी हैं। राज्यवार आंकड़ों की बात करें तो वे हैं:
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शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य:
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महाराष्ट्र: 66 विनिर्माण इकाइयों के साथ तालिका में सबसे ऊपर है।
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तमिलनाडु: देश का एक प्रमुख ऑटोमोबाइल विनिर्माण केंद्र होने के नाते 38 इकाइयों के साथ दूसरे स्थान पर है।
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हरियाणा: 35 विनिर्माण इकाइयों के साथ तीसरे स्थान पर है।
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कर्नाटक: 28 विनिर्माण इकाइयों के साथ चौथे स्थान पर मौजूद है।
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अन्य राज्यों का आंकड़ा:
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उत्तर प्रदेश: 13 विनिर्माण इकाइयां।
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गुजरात: 10 विनिर्माण इकाइयां।
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उत्तराखंड: 9 विनिर्माण इकाइयां।
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राजस्थान: 7 विनिर्माण इकाइयां।
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मध्य प्रदेश: 6 विनिर्माण इकाइयां।
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तेलंगाना: 5 विनिर्माण इकाइयां।
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आंध्र प्रदेश और झारखंड: 2-2 विनिर्माण इकाइयां।
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असम, केरल, पुडुचेरी और पंजाब: प्रत्येक राज्य में 1-1 विनिर्माण इकाई स्थापित हुई है।
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PLI-ऑटो योजना ने अब तक देश की अर्थव्यवस्था, नौकरियों और निवेश को कितना बढ़ाया है?
31 मार्च 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, इस योजना ने देश के ऑटोमोबाइल सेक्टर की कायाकल्प करने में बड़ी सफलता हासिल की है:
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भारी-भरकम निवेश: इस योजना के तहत देश भर में कुल 44,326 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ है।
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रोजगार का सृजन: विनिर्माण इकाइयों के स्थापित होने से अब तक 67,820 नौकरियां पैदा हुई हैं।
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बिक्री में अभूतपूर्व वृद्धि: आधार वर्ष 2019-20 की तुलना में योजना के तहत 52,414 करोड़ रुपये की वृद्धिशील बिक्री दर्ज की गई है।
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वितरित प्रोत्साहन: सरकार द्वारा पात्र कंपनियों को अब तक 2,386.36 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि जारी की जा चुकी है।
क्या है PLI-ऑटो योजना और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
सितंबर 2021 में 25,938 करोड़ रुपये के कुल बजटीय परिव्यय के साथ मंजूर की गई PLI-ऑटो योजना का उद्देश्य भारत की ऑटो निर्माण क्षमता को नई ऊंचाइयों पर ले जाना है:
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उन्नत तकनीकों का निर्माण:
इसका उद्देश्य एडवांस्ड ऑटोमोटिव प्रोडक्ट्स (AAT) में भारत की विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करना और उन्नत ऑटोमोटिव प्रौद्योगिकियों और घटकों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना है। -
स्थानीकरण पर जोर:
योजना ने इस क्षेत्र में स्वदेशीकरण को बढ़ावा दिया है। सब्सिडी या प्रोत्साहन पाने की पात्रता के लिए आवेदकों को कम से कम 50 प्रतिशत घरेलू मूल्य संवर्धन हासिल करना अनिवार्य है। -
DVA प्रमाण पत्र का आंकड़ा:
मंत्रालय ने बताया कि 16 जुलाई 2026 तक, 18 आवेदकों को 154 उत्पादों या वेरिएंट्स के लिए DVA प्रमाणपत्र प्राप्त हो चुके थे।
क्या किसी राज्य को योजना के तहत विशेष छूट या इंसेंटिव मिलता है?
सरकार ने छिंदवाड़ा जिले सहित मध्य प्रदेश में ऑटोमोबाइल और उससे जुड़े उद्योगों के विकास के सवालों का जवाब देते हुए इस नीतिगत नियम को बिल्कुल साफ किया:
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अखिल भारतीय स्तर पर कार्यान्वयन:
PLI-ऑटो योजना पूरे देश में एक समान रूप से लागू की गई है। स्वीकृत आवेदकों को देश में कहीं भी अपनी विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने की पूरी आजादी है। -
किसी विशेष राज्य को छूट नहीं:
योजना के तहत किसी भी विशेष राज्य को कोई अलग या विशेष वित्तीय प्रोत्साहन नहीं दिया जाता है। मध्य प्रदेश भी इस अखिल भारतीय योजना के तहत ही कवर है और उसे कोई अलग से विशेष पैकेज नहीं मिलता।
खास बात: इस योजना का अंतिम उद्देश्य देश में भारी निवेश आकर्षित करना, उत्पादन बढ़ाना, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करना और एडवांस्ड ऑटो पार्ट्स के स्वदेशीकरण को बढ़ावा देकर भारत के पूरे ऑटोमोबाइल इकोसिस्टम को मजबूत करना है।