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Bike Taxi: बाइक टैक्सी सेवाएं फिर से शुरू, लेकिन कर्नाटक उच्च न्यायालय ने साफ किया- कोई न्यायिक मंजूरी नहीं दी

Sat, 23 Aug 2025 04:55 PM IST
अमर शर्मा ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमर शर्मा Updated Sat, 23 Aug 2025 04:55 PM IST
सार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ किया है कि उसने किसी भी राइड-हेलिंग कंपनी को बाइक टैक्सी सेवाएं फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी है। यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब एक दिन पहले शहर की सड़कों पर फिर से बाइक टैक्सी चलते हुए दिखाई दीं।

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Bike taxi services resume, but Karnataka High Court clarifies no judicial nod given Latest News in Hindi
कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

कर्नाटक हाईकोर्ट ने साफ किया है कि उसने किसी भी राइड-हेलिंग कंपनी को बाइक टैक्सी सेवाएं फिर से शुरू करने की अनुमति नहीं दी है। यह स्पष्टीकरण उस समय आया जब एक दिन पहले शहर की सड़कों पर फिर से बाइक टैक्सी चलते हुए दिखाई दीं। 
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राज्य सरकार कार्रवाई कर सकती है
मुख्य न्यायाधीश विभु बखरु की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच ने कहा कि राज्य सरकार कानून के मुताबिक बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स (जैसे कंपनियां - ओला, ऊबर, रैपिडो) पर कार्रवाई कर सकती है। लेकिन प्रवर्तन एजेंसियों को व्यक्तिगत गाड़ी मालिकों को परेशान नहीं करना चाहिए।
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सरकार को नीति बनाने के लिए समय
20 अगस्त की सुनवाई के दौरान बेंच ने मामला 22 सितंबर तक के लिए टाल दिया और राज्य सरकार से पूछा कि क्या वह बाइक टैक्सियों को लेकर कोई नीति बनाने का इरादा रखती है।

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"कोर्ट से कोई आदेश नहीं आया"
शुक्रवार को एडवोकेट जनरल शशिकिरण शेट्टी ने अदालत को बताया कि कई ऑपरेटरों ने सेवाएं फिर से शुरू कर दी हैं। जबकि अदालत की ओर से कोई आदेश पारित नहीं किया गया है। इस पर बाइक टैक्सी चालकों की ओर से पेश वकीलों ने तर्क दिया कि प्रवर्तन अधिकारी व्यक्तिगत मोटरसाइकिलों को जब्त कर रहे हैं।

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रैपिडो - फोटो : Adobe Stock
"व्यक्तिगत वाहन मालिकों को परेशान न करें"
बेंच ने स्पष्ट किया कि अदालत की चिंता सिर्फ इस बात की थी कि बाइक टैक्सी चालक और मालिकों को अनावश्यक दिक्कत न हो। मुख्य न्यायाधीश बखरु ने एडवोकेट जनरल से कहा, "व्यक्तिगत मालिकों को परेशान मत कीजिए।" इस पर शेट्टी ने भरोसा दिलाया कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।

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कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया गया
अदालत ने यह भी साफ कर दिया कि उसने अब तक इस मामले में कोई अंतरिम आदेश पारित नहीं किया है। फिलहाल सभी अपीलों को अंतिम सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

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किसने दायर की याचिकाएं
इस मामले में याचिकाएं ऊबर इंडिया सिस्टम्स, एएनआई टेक्नोलॉजीज प्रा. लि. (ओला), रॉपन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्रा. लि. (रैपिडो) और अन्य कंपनियों ने दायर की थीं।

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कर्नाटक उच्च न्यायालय - फोटो : karnataka high court
पहले का आदेश
इससे पहले 2 अप्रैल 2025 को एकल न्यायाधीश की पीठ ने कहा था कि जब तक राज्य सरकार मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 93 और उससे संबंधित नियमों के तहत दिशानिर्देश जारी नहीं करती, तब तक बाइक टैक्सी सेवाओं की अनुमति नहीं दी जा सकती। अदालत ने यह भी माना था कि सरकार को एग्रीगेटर लाइसेंस के आवेदन को मंजूरी देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। 

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