BYD IOU: सप्लायर्स की विरोध के बाद दिलियन आईओयू सिस्टम से बैकफुट पर आई चीन की ये दिग्गज कंपनी, जाने पेमेंट मोड
BYD IOU: चीन की दिग्गज ईवी बीवाईडी कंपनी अब बैंक नोट्स और कमर्शियल पेपर की तरफ लौट रही है। चीन में बढ़ती प्राइस वॉर, कड़े सरकारी नियम और घटती बिक्री के बीच यह कदम उसके बिजनेस मॉडल के लिए बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
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चीन की इलेक्ट्रिक व्हीकल दिग्गज बीवाईडी अपने विवादित इन हाउस पेमेंट सिस्टम दिलियन आईओयू से पीछे हटने लगी है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार कंपनी ने कई सप्लायर्स को संकेत दिया है कि वह अब पेमेंट के लिए इन्हीं इलेक्ट्रॉनिक आईओयू नोट्स का इस्तेमाल नहीं करेगी।
यह कदम ऑटो इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि दिलियन सिस्टम ने पिछले कई वर्षों में बीवाईडी के कैश-फ्लो में ज्यादा फायदा पहुंचाया, लेकिन इसकी कीमत सप्लायर्स को भारी नुकसान के रूप में चुकानी पड़ी।
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क्या थी सप्लायर्स के परेशानी की वजह ?
2018 में लॉन्च किया गया दिलियन एक इलेक्ट्रॉनिक इंटरसेक्शन ओवर यूनियन (आईओयू) प्लेटफॉर्म था, जिसके जरिए बीवाईडी सप्लायर्स को पैसे देने की बजाय डिजिटल वाउचर जारी करती थी। समस्या यह थी कि इन वाउचर्स पर सीधा सरकारी रेगुलेशन लागू नहीं होता। डिफॉल्ट रिस्क ज्यादा था और सप्लायर के जल्दी कैश चाहने पर उन्हें छह प्रतिशत तक बैंक में डिस्काउंट करवाना पड़ता था। इसके मुकाबले बैंक नोट्स पर डिस्काउंट रेट आमतौर पर दो प्रतिशत से भी कम होता है।
कई सप्लायर्स का कहना है कि बीवाईडी इन आईओयू के चलते पेमेंट 6 महीने से लेकर एक साल तक टाल देती थी, जिससे उनकी कैश फ्लो स्थिति बदतर हो जाती थी।
बीवाईडी की मदद से बनी कॉस्ट किंग
विशेषज्ञों के अनुसार दिलियन सिस्टस से बीवाईडी को तीन बड़े फायदे मिले:
1. वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बेहद कम
2. हमेशा हाथ में बड़ा कैश रिजर्व
3. सप्लायर्स पर कीमतें घटाने का दबाव आसान
इसी वजह से बीवाईडी नई-नई कारें तेजी से लॉन्च करती रही और लागत के मामले में दुनिया की कॉस्ट किंग बन गई।
लेकिन अब हालात में बदलाव…
चीन के ऑटो बाजार में भयंकर प्राइस वॉर चल रहा है। ईवी कंपनियां कीमतें इतनी कम कर चुकी हैं कि कई सप्लायर गुजारा नहीं कर पा रहे हैं। सरकार ने भी नए नियम लागू कर दिए हैं। जैसे की सप्लायर्स को 60 दिन में पेमेंट अनिवार्य करना, इलेक्ट्रॉनिक आईओयू बंद करना और सप्लाई चेन फाइनेंसिंग पर कड़ा मॉनिटरिंग । इन नियमों ने बीवाईडी के लिए दिलियन सिस्टम को जारी रखना मुश्किल बना दिया है।
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बीवाईडी की सेल्स भी लगातार दबाव में
यह बदलाव ऐसे समय हो रहा है जब बीवाईडी की स्थिति खुद चुनौतीपूर्ण है। अक्तूबर में इसकी 12 प्रतिशत सेल्स गिर गई। घरेलू मार्केट शेयर 19.1 प्रतिशत से 13.2 प्रतिशत पहुंच गई और पिछले क्वार्टर में राजस्व तीन प्रतिशत तक गिर गया। मुनाफा तो एक तिहाई कम हो गया, जोकि पांच साल में सबसे बड़ा गिराव है।
हॉन्गकॉन्ग की जीएमटी रिसर्च ने तो दावा किया था कि बीवाईडी का वास्तविक नेट डेट 323 अरब युआन है, जबकि कंपनी सिर्फ 27.7 अरब युआन बताती है। रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया कि दिलियन वाउचर बीवाईडी की सप्लाई चेन के बाहर भी घूम रहे थे। एक रिवेट निर्माता ने कहा कि उसे पिछले दो वर्षों में चार से पांच बार दिलियन वाउचर से पेमेंट किया गया है। यानी सिस्टम पूरे बाजार में फैल चुका था।
डेटा दर्शाता है कि पिछले साल बीवाईडी ने अपने सप्लायर्स और शॉर्ट-टर्म क्रेडिटर्स को औसतन 127 दिन में पेमेंट किया था। कुछ दिलियन नोट्स में तो एक साल तक पेमेंट न करने की शर्त थी। जबकि चीन में इंडस्ट्री एवरेज 108 दिन था। दुनिया की ज्यादातर बड़ी कार कंपनियां 90 दिन से कम में और कई तो 60 दिन से भी कम में पेमेंट कर देती हैं।