इथेनॉल से कम नहीं होगा दोपहिया वाहनों का माइलेज!: हीरो मोटोकॉर्प के सीबीओ का बड़ा बयान
टू-व्हीलर वाहनों में इथेनॉल मिश्रित ईंधन के इस्तेमाल से माइलेज में होने वाली कमी को लेकर चिंता की जरूरत नहीं है। हीरो मोटोकॉर्प के सीबीओ अशुतोष वर्मा का कहना है कि इथेनॉल का कैलोरिफिक वैल्यू कम होने के कारण माइलेज पर कुछ असर जरूर पड़ सकता है, लेकिन वाहन निर्माता कंपनियां लगातार नई तकनीकों के जरिए वाहनों की ईंधन दक्षता बेहतर कर रही हैं।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
देश के दोपहिया वाहन बाजार में इथेनॉल युक्त पेट्रोल के इस्तेमाल को लेकर माइलेज घटने की चिंताएं अक्सर जताई जाती हैं। हालांकि, देश की सबसे बड़ी टू-व्हीलर निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प (Hero MotoCorp) के चीफ बिजनेस ऑफिसर (इंडिया) आशुतोष वर्मा ने इन चिंताओं को खारिज कर दिया है।
'फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन' (FADA) द्वारा आयोजित ऑटो रिटेल कॉन्क्लेव के दौरान मीडिया से बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि इथेनॉल के इस्तेमाल से गाड़ियों के माइलेज पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। उनके मुताबिक, भारतीय वाहन निर्माता अब ऐसी तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो इथेनॉल के कारण होने वाली संभावित माइलेज कमी की काफी हद तक भरपाई कर सकती हैं।
इथेनॉल से माइलेज पर कितना असर पड़ सकता है?
- आशुतोष वर्मा ने स्वीकार किया कि इथेनॉल का कैलोरीफिक वैल्यू पारंपरिक पेट्रोल की तुलना में कम होता है। जिससे सैद्धांतिक रूप से माइलेज में थोड़ी गिरावट आ सकती है। हालांकि, उन्होंने इसे टू-व्हीलर उद्योग के लिए कोई बड़ी चिंता नहीं बताया। उनके अनुसार, वाहन निर्माता कंपनियां लगातार अपने उत्पादों की दक्षता बढ़ाने पर काम कर रही हैं, जिससे वैकल्पिक ईंधनों के इस्तेमाल के बावजूद माइलेज पर पड़ने वाले असर को कम किया जा सके।
- उन्होंने कहा, “इथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू कम है, इसलिए उस हद तक माइलेज में कुछ कमी आती है। लेकिन भारतीय वाहन निर्माताओं ने वाहनों की दक्षता बढ़ाने के लिए कई तकनीकों का इस्तेमाल किया है।”
OEMs माइलेज की कमी को कैसे कम कर रहे हैं?
- वर्मा के अनुसार, भारतीय वाहन निर्माता कंपनियां आइडल स्टॉप-स्टार्ट सिस्टम (Idle Stop-Start Systems) और लो-रोलिंग-रेजिस्टेंस टायर्स (Low-Rolling-Resistance Tyres) जैसी एडवांस्ड तकनीकों का इस्तेमाल कर रही हैं।
- इन तकनीकों का उद्देश्य ईंधन की खपत को कम करना और वाहन की समग्र दक्षता को बेहतर बनाना है। उनका कहना है कि ऐसी तकनीकी प्रगति से इथेनॉल के कम कैलोरिफिक वैल्यू के कारण माइलेज में आने वाले अंतर को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
- उन्होंने जोर देकर कहा कि टू-व्हीलर उद्योग में इथेनॉल से माइलेज पर पड़ने वाला असर ऐसी कोई व्यापक चिंता नहीं है, जिस पर हर स्तर पर चर्चा हो रही हो।
क्या इथेनॉल से वाहनों में ज्यादा नुकसान की शिकायतें मिली हैं?
- Hero MotoCorp के अधिकारी ने वैकल्पिक ईंधनों को लेकर भरोसा जताते हुए कहा कि अब तक अधिक नुकसान की कोई घटना रिपोर्ट नहीं हुई है।
- उन्होंने कहा कि उद्योग में नई ऊर्जा और वैकल्पिक ईंधन के कई विकल्प विकसित किए जा रहे हैं, जो आने वाले समय में ऑटोमोबाइल सेक्टर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
- वर्मा ने सरकार की पहल का भी स्वागत किया और इसे देश को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने वाला एक उत्कृष्ट कदम बताया।
टू-व्हीलर उद्योग के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
- FADA द्वारा आयोजित ऑटो रिटेल कॉन्क्लेव के दौरान ANI से बातचीत में अशुतोष वर्मा ने कहा कि टू-व्हीलर उद्योग के सामने मांग में लगातार होने वाला उतार-चढ़ाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
- उनके मुताबिक, पिछले चार से पांच वर्षों में कोविड-19 महामारी सहित कई बार बाजार में व्यवधान आए हैं, जिसके कारण मांग के रुझानों का अनुमान लगाना मुश्किल हो गया है।
- उन्होंने कहा कि पिछले साल और 2026 के दौरान उद्योग का आउटलुक सकारात्मक रहा है। ऐसे में बाजार की दिशा को समझना, उसी के अनुरूप निवेश करना और भविष्य के लिए तैयार रहना उद्योग के लिए महत्वपूर्ण होगा।
डिजिटल बदलाव को चुनौती मानें या अवसर?
- वर्मा ने डिजिटाइजेशन और तेजी से बदलते डिजिटल इकोसिस्टम के अनुरूप उद्योग की तैयारी को भी एक बड़ा बदलाव बताया। हालांकि, उन्होंने इसे केवल चुनौती के रूप में नहीं देखा।
- उनके अनुसार, ऑटोमोबाइल उद्योग इस समय एक दिलचस्प दौर में प्रवेश कर रहा है और बदलती तकनीक तथा उपभोक्ताओं की जरूरतों के साथ तालमेल बिठाना कंपनियों के लिए नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
- उन्होंने FADA के इस वार्षिक आयोजन की भी सराहना करते हुए कहा कि यह पूरे ऑटोमोबाइल उद्योग के डीलरों और निर्माताओं को एक मंच पर लाता है, जहां वे विचारों का आदान-प्रदान कर सकते हैं और एक-दूसरे के अनुभवों से सीख सकते हैं।