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अब दिल्ली में सफर होगा और आसान: संकरी गलियों में दौडेंगी 500 नई सात सीटर ई-बसें, जानें सरकार की पूरी योजना

Thu, 26 Feb 2026 02:46 PM IST
जागृति ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ऑटो डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जागृति Updated Thu, 26 Feb 2026 02:46 PM IST
सार

Delhi mini electric buses: दिल्ली सरकार ने राजधानी की लास्ट-माइल कनेक्टिविटी को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत दिल्ली की सड़कों पर पहली बार सात मीटर की छोटी इलेक्ट्रिक बसें उतरेंगी। ये बसें न केवल संकरी गलियों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में पहुंचेंगी, बल्कि ई-रिक्शा पर निर्भरता कम कर मेट्रो स्टेशनों तक का सफर आसान और सुरक्षित बनाएंगी।

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500 new seven-seater e-buses will run narrow streets, know complete government plan
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Freepik

विस्तार

दिल्ली सरकार ने केंद्र की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 500 सात मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसें लाने का फैसला किया है। ये कॉम्पैक्ट, लो-फ्लोर और एसी बसें भीड़भाड़ वाली कॉलोनियों व संकरी सड़कों पर लास्ट-माइल कनेक्टिविटी मजबूत करेंगी। यह कदम 3,330 अतिरिक्त ई-बसों के बड़े विस्तार प्लान का हिस्सा है, जिससे 2028 तक राजधानी का इलेक्ट्रिक बस नेटवर्क देश के सबसे बड़े और स्वच्छ फ्लीट्स में शामिल हो सकता है।
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क्या है नई योजना?
दिल्ली सरकार ने पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 500 नई 7 मीटर इलेक्ट्रिक बसों की खरीद का प्रस्ताव भेजा है। यह चरण-दो के विस्तार का हिस्सा है, जिसमें कुल 3,330 अतिरिक्त बसें हैं। इस प्रस्ताव में शामिल हैं:
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  • 500 बसें (7 मीटर): पहली बार दिल्ली की सड़कों पर।
  • 2,330 बसें (9 मीटर): फीडर और छोटे रूट्स के लिए।
  • 500 बसें (12 मीटर): मुख्य सड़कों और हाई-ट्रैफिक इलाकों के लिए।
  • सभी बसें लो-फ्लोर और एयर-कंडीशन्ड होंगी।
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क्यों अहम हैं 7-मीटर ई-बसें?

राजधानी की कई कॉलोनियों में बड़ी बसों का संचालन मुश्किल है। नई मिनी ई-बसें संकरी गलियों में बेहतर टर्निंग रेडियस के साथ चल सकेंगी, मेट्रो स्टेशनों तक फीडर सेवा मजबूत करेंगी। इससे ई-रिक्शा या निजी वाहनों की निर्भरता घट सकती है और निर्धारित समय-सारिणी के साथ विश्वनीय सेवा देनी होगी। ये मॉडल शहरी माइक्रो-रूट्स पर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को व्यवहारिक बनाता है। 

इन फीचर्स से लैस होंगी छोटी बसें
भले ही इन बसों का साइज छोटा हो, लेकिन सुविधाएं बड़ी बसों जैसी ही होंगी। सभी बसें लो-फ्लोर और एसी होंगी, जिनमें शामिल हैं:
  • सुरक्षा: यात्रियों के लिए सीसीटीवी कैमरे और पैनिक बटन।
  • ट्रैकिंग: जीपीएस और रीयल-टाइम पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम।
  • सुविधा: लो-फ्लोर होने के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांगों को चढ़ने-उतरने में आसानी होगी।
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कब तक मिलेंगी ये बसें?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इन बसों की डिलीवरी 2027-28 तक बैचों में होने की उम्मीद है। वर्तमान में दिल्ली में 5,300 से अधिक बसें हैं, जिनमें से 4,000 इलेक्ट्रिक हैं। लक्ष्य यह है कि 2028 तक दिल्ली की बस फ्लीट को 13,760 तक पहुंचाया जा सके, जिससे यह दुनिया का सबसे बड़ा और स्वच्छ इलेक्ट्रिक नेटवर्क बन सकेंगे। कहा कि अतिरिक्त बसों की मांग सब्सिडी मॉडल के तहत की गई है। जरूरत पड़ने पर राज्य सरकार देरी से बचने के लिए वित्तीय बोझ वहन करने को भी तैयार है। साथ ही, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डिपो आधारित फास्ट चार्जर और रूट-एंड चार्जिंग को समानांतर बढ़ाया जाएगा, ताकि ऑपरेशनल अपटाइम बना रहे।

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