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वृषभ संक्रांति आज, इस दिन स्नान, दान और सूर्य पूजा की परंपरा
Thu, 14 May 2020 01:26 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 14 May 2020 01:26 PM IST
सार
- सूर्य का राशि परिवर्तन ज्योतिष के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है।
- हिंदू कैलेंडर के अनुसार वृषभ संक्रांति साल के तीसरे महीने ज्येष्ठ में आती है।
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विस्तार
आज यानि 14 मई 2020 को सूर्य संक्रांति है। सूर्य हर माह अपनी राशि बदलते हैं। सूर्य जब मेष राशि में भ्रमण करते हुए वृषभ राशि में आते हैं तो इसे वृषभ संक्रांति कहते हैं। सूर्य का राशि परिवर्तन ज्योतिष के लिए एक महत्वपूर्ण घटना है। 14 मई को सूर्य शाम के 5 बजकर 33 मिनट पर मेष से वृषभ राशि में प्रवेश करेगा। सूर्य संक्रांति पर गंगा स्नान, दान और पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन दान और स्नान करने से पुण्य लाभ मिलता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार वृषभ संक्रांति साल के तीसरे महीने ज्येष्ठ में आती है। इसमे सूर्य उपासना का विशेष फायदा मिलता है।
14 मई को सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें राशिनुसार इसका शुभ-अशुभ प्रभाव
पूजा विधि
- कोरोना महामारी के चलते पवित्र नदियों में गंगा स्नान करना नहीं हो पा रहा है ऐसे में सूर्य संक्रांति पर बीमारियों से बचने और सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए घर पर पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर स्नान करना चाहिए।
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-स्नान के बाद उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे में लाल फूल और अक्षत डालकर जल चढ़ाएं।
- स्नान करने के बाद व्रत रखें और गरीबों को दान करें।
- वृषभ संक्रांति पर पीपल के पेड़ में जल और तुलसी की पूजा करें।
- जानवरों को पानी और दाने डालें।
ज्योतिष में सूर्य उपासना का महत्व
किसी भी जातक की जन्मकुंडली में उच्चराशिगत सूर्य जातक को धनी और राजयोगी बनाते हैं। ये सिंह राशि के स्वामी हैं तुला राशि की यात्रा के समय ये नीचराशिगत संज्ञक होते हैं और मेष राशि की यात्रा पर उच्च के होते हैं। मंदार पुष्प की माला इन्हें सबसे अधिक प्रिय है, इसके अतिरिक्त इन्हें कनेर, गुडहल, बकुल, मल्लिका, के पुष्प ताबे के पात्र में जल के साथ अर्घ्य देने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।
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14 मई को सूर्य का वृषभ राशि में प्रवेश, जानें राशिनुसार इसका शुभ-अशुभ प्रभाव
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पूजा विधि
- कोरोना महामारी के चलते पवित्र नदियों में गंगा स्नान करना नहीं हो पा रहा है ऐसे में सूर्य संक्रांति पर बीमारियों से बचने और सूर्यदेव की कृपा पाने के लिए घर पर पानी में गंगाजल की कुछ बूंदे डालकर स्नान करना चाहिए।
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-स्नान के बाद उगते हुए सूर्य को तांबे के लोटे में लाल फूल और अक्षत डालकर जल चढ़ाएं।
- स्नान करने के बाद व्रत रखें और गरीबों को दान करें।
- वृषभ संक्रांति पर पीपल के पेड़ में जल और तुलसी की पूजा करें।
- जानवरों को पानी और दाने डालें।
ज्योतिष में सूर्य उपासना का महत्व
किसी भी जातक की जन्मकुंडली में उच्चराशिगत सूर्य जातक को धनी और राजयोगी बनाते हैं। ये सिंह राशि के स्वामी हैं तुला राशि की यात्रा के समय ये नीचराशिगत संज्ञक होते हैं और मेष राशि की यात्रा पर उच्च के होते हैं। मंदार पुष्प की माला इन्हें सबसे अधिक प्रिय है, इसके अतिरिक्त इन्हें कनेर, गुडहल, बकुल, मल्लिका, के पुष्प ताबे के पात्र में जल के साथ अर्घ्य देने से सभी प्रकार के कष्ट दूर हो जाते हैं।