वास्त्रु के नियमों से घर, ऑफिस और व्यापारिक अनुष्ठान में आने वाली नकारात्मक ऊर्जा को दूर किया जाता है। वास्तु शास्त्र का नियम यह स्पष्ट करता है कि शुभता के लिए किस दिशा में कौनसी चीजें होनी चाहिए। लेकिन कई बार वास्तु के नियमों की जानकारी न होने से हम नकारात्मक ऊर्जा से घिरे रहते हैं और हमारे जीवन में तरक्की रुक जाती है।
2 of 10
वास्तुशास्त्र में दिशाओं का महत्व
- फोटो : vastu tips
दिशाओं को लेकर वास्तु का नियम
वास्तु के अनुसार दस दिशाएं होती हैं। पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण, ईशान (उत्तर-पूर्व), नैऋत्य (दक्षिण-पश्चिम), वायव्य (उत्तर-पश्चिम), आग्नेय (दक्षिण-पूर्व), आकाश (उर्ध्व), पाताल (अधो)। इन दसों दिशाओं का अपना विशेष महत्व है।
3 of 10
vastu tips
- फोटो : social media
पूर्व दिशा के स्वामी सूर्य देव हैं। सामान्य रूप से इस दिशा में घर का मुख्य द्वार होना चाहिए।
पश्चिम दिशा के देवता वरूण और ग्रह स्वामी शनि है। यह दिशा भी वास्तु नियमों के अनुसार होना चाहिए।
उत्तर दिशा के देवता कुबेर हैं। इस दिशा में घर की तिजोरी होनी चाहिए।