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Sun Transit 2025: सूर्य का सिंह राशि में परिवर्तन, जानिए वृषभ राशि वालों पर कैसा रहेगा प्रभाव
Mon, 18 Aug 2025 07:20 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 18 Aug 2025 07:20 PM IST
सार
Sun Transit 2025: वृषभ राशि के जातकों के लिए सूर्य चौथे भाव के स्वामी होते हैं और अब सिंह राशि में सूर्य का गोचर आपके चौथे भाव में हुआ है। कुंडली का चौथा भाव सुख, मकान, जमीन-जायदाद से जुड़ा हुआ है।
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Sun Transit 2025
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Sun Transit 2025: ग्रहों के राजा सूर्य 17 अगस्त 2025 को चंद्रमा की राशि कर्क की अपनी यात्रा को विराम देते हुए अपने स्वामित्व वाली राशि सिंह में प्रवेश कर चुके हैं। वैदिक ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के गोचर का विशेष महत्व होता है। सूर्य हर एक माह अपनी राशि बदलते हैं जिसे सूर्य संक्रांति के नाम से जाना जाता है। सूर्य के बिना जीवन की कल्पना करना मुश्किल क्योंकि यह ही ऊर्जा के प्रमुख स्त्रोत हैं। सभी नवग्रहों में सूर्य ही एकमात्र ग्रह है जो कभी भी न तो अस्त होते हैं और न ही उदय। इसके अलावा सूर्य वक्री और मार्गी भी नहीं होते हैं। सूर्य 17 सितंबर 2025 तक सिंह राशि में रहेंगे फिर इसके बाद कन्या राशि में चले जाएंगे। सूर्य के सिंह राशि में गोचर होने के सभी 12 राशियों के जातकों के ऊपर किसी न किसी रूप में प्रभाव अवश्य ही पड़ेगा। आइए जानते हैं सूर्य के सिंह राशि में गोचर करने से मेष राशि वालों पर किस तरह का प्रभाव देखने को मिलेगा।
वृषभ राशि पर सूर्य के गोचर का प्रभाव
वृषभ राशि के जातकों के लिए सूर्य चौथे भाव के स्वामी होते हैं और अब सिंह राशि में सूर्य का गोचर आपके चौथे भाव में हुआ है। कुंडली का चौथा भाव सुख, मकान, जमीन-जायदाद से जुड़ा हुआ है। इस भाव में सूर्य के गोचर का प्रभाव ज्यादा अनुकूल परिणाम देने वाला नहीं होगा। इस दौरान मानसिक रूप से परेशान रहेंगे। मन में तनाव बना रह सकता है। लेकिन इस दौरान आपके कुछ घरेलू वाद-विवाद में विजय प्राप्ति होगी। इस दौरान जमीन जायदाद के मामले में आपको अच्छा फल मिलने के संकेत हैं।
सूर्य से जुड़े कुछ रोचक ज्योतिषीय तथ्य
- सूर्यदेव को पूर्व दिशा का स्वामी माना गया है।
- सूर्यदेव तांबे और सोने के स्वामी होते हैं।
- वैदिक ज्योतिष में सूर्य को जन्म कुंडली में पिता, मान-सम्मान, लीडरशिप, राजकाज और उच्च प्रशासिनक पद के कारक होते हैं।
- किसी पुरुष की कुंडली में सूर्य से पिता और महिला की कुंडली में पति के बारे में जानकारी प्राप्ति होती है।
- सूर्य की महादशा 6 वर्षों तक रहती है।
- सूर्य उपासना के लिए रविवार का दिन सबसे अच्छा माना गया है।
- सूर्य सिंह राशि के स्वामी होते हैं।
- सूर्य मेष राशि में उच्च के जबकि तुला राशि में नीच के होते हैं।
- जातक की कुंडली में सूर्य लग्न में हो तो व्यक्ति का चेहरा बड़ा और गोल आकार का होता है। सूर्य पुरुषों में दायीं आंख और महिलाओं की बायीं आंख को बताता है।
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- कालपुरुष की कुंडली में सूर्य ह्रदय को दर्शाता है।
- सूर्य का रत्न माणिक्य होता है।
- मेष राशि में सूर्य 10 अंश के होने पर ये परम उच्च के हो जाते हैं, जबकि तुला राशि में 10 अंश के होने पर नीच के हो जाते हैं।
- मकर से मिथुन राशि के भ्रमण दौरान सूर्य उत्तरायन होते हैं।
- कर्क से धनु राशि के भ्रमण के दौरान दक्षिणायन सूर्य होते हैं।
कुंडली में सूर्य जब पीड़ित हों
अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य पीड़ित है तो व्यक्ति को ह्रदय और आंखों संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सूर्य अगर शनि देव के प्रभाव के कारण पीड़ित होते हैं तो व्यक्ति को कम बल्ड प्रेशर से संबंधित समस्याएं आती हैं। अगर गुरु से पीड़ित होता है तो उच्च ब्लड प्रेशर से संबंधित बीमारी देखने को मिलती है।
कुंडली में सूर्य मजबूत होते हैं तो जातक को जीवन में हमेशा शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है। व्यक्ति अच्छे कार्य करते उच्च पद पर आसीन होती है। ऐसे जातकों पर स्वयं पर बहुत अच्छा नियंत्रण होता है। कुंडली में सूर्य जब उच्च के, अच्छे भाव में, शुभ ग्रहों की द्दष्टि में और अपने मित्र ग्रह की राशि में होते हैं तो जातक को बहुत ही अच्छा फल देते हैं। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य अच्छा होता है व्यक्ति सकारात्मक सोच वाला और समाज में सम्मानित होता है। सूर्य राजा, उच्च पद और स्थायित्व का कारक होता है।
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वृषभ राशि पर सूर्य के गोचर का प्रभाव
वृषभ राशि के जातकों के लिए सूर्य चौथे भाव के स्वामी होते हैं और अब सिंह राशि में सूर्य का गोचर आपके चौथे भाव में हुआ है। कुंडली का चौथा भाव सुख, मकान, जमीन-जायदाद से जुड़ा हुआ है। इस भाव में सूर्य के गोचर का प्रभाव ज्यादा अनुकूल परिणाम देने वाला नहीं होगा। इस दौरान मानसिक रूप से परेशान रहेंगे। मन में तनाव बना रह सकता है। लेकिन इस दौरान आपके कुछ घरेलू वाद-विवाद में विजय प्राप्ति होगी। इस दौरान जमीन जायदाद के मामले में आपको अच्छा फल मिलने के संकेत हैं।
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सूर्य से जुड़े कुछ रोचक ज्योतिषीय तथ्य
- सूर्यदेव को पूर्व दिशा का स्वामी माना गया है।
- सूर्यदेव तांबे और सोने के स्वामी होते हैं।
- वैदिक ज्योतिष में सूर्य को जन्म कुंडली में पिता, मान-सम्मान, लीडरशिप, राजकाज और उच्च प्रशासिनक पद के कारक होते हैं।
- किसी पुरुष की कुंडली में सूर्य से पिता और महिला की कुंडली में पति के बारे में जानकारी प्राप्ति होती है।
- सूर्य की महादशा 6 वर्षों तक रहती है।
- सूर्य उपासना के लिए रविवार का दिन सबसे अच्छा माना गया है।
- सूर्य सिंह राशि के स्वामी होते हैं।
- सूर्य मेष राशि में उच्च के जबकि तुला राशि में नीच के होते हैं।
- जातक की कुंडली में सूर्य लग्न में हो तो व्यक्ति का चेहरा बड़ा और गोल आकार का होता है। सूर्य पुरुषों में दायीं आंख और महिलाओं की बायीं आंख को बताता है।
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- कालपुरुष की कुंडली में सूर्य ह्रदय को दर्शाता है।
- सूर्य का रत्न माणिक्य होता है।
- मेष राशि में सूर्य 10 अंश के होने पर ये परम उच्च के हो जाते हैं, जबकि तुला राशि में 10 अंश के होने पर नीच के हो जाते हैं।
- मकर से मिथुन राशि के भ्रमण दौरान सूर्य उत्तरायन होते हैं।
- कर्क से धनु राशि के भ्रमण के दौरान दक्षिणायन सूर्य होते हैं।
कुंडली में सूर्य जब पीड़ित हों
अगर किसी जातक की कुंडली में सूर्य पीड़ित है तो व्यक्ति को ह्रदय और आंखों संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सूर्य अगर शनि देव के प्रभाव के कारण पीड़ित होते हैं तो व्यक्ति को कम बल्ड प्रेशर से संबंधित समस्याएं आती हैं। अगर गुरु से पीड़ित होता है तो उच्च ब्लड प्रेशर से संबंधित बीमारी देखने को मिलती है।
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कुंडली में सूर्य जब बली होंकुंडली में सूर्य मजबूत होते हैं तो जातक को जीवन में हमेशा शुभ परिणाम की प्राप्ति होती है। व्यक्ति अच्छे कार्य करते उच्च पद पर आसीन होती है। ऐसे जातकों पर स्वयं पर बहुत अच्छा नियंत्रण होता है। कुंडली में सूर्य जब उच्च के, अच्छे भाव में, शुभ ग्रहों की द्दष्टि में और अपने मित्र ग्रह की राशि में होते हैं तो जातक को बहुत ही अच्छा फल देते हैं। जिन जातकों की कुंडली में सूर्य अच्छा होता है व्यक्ति सकारात्मक सोच वाला और समाज में सम्मानित होता है। सूर्य राजा, उच्च पद और स्थायित्व का कारक होता है।