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मंगल नहीं है अमंगल जानिए कैसे, सफलता से जुड़ा है खास रिश्ता

Sun, 03 Jun 2018 11:17 AM IST
पं.सतीश शर्मा
पं.सतीश शर्मा Updated Sun, 03 Jun 2018 11:17 AM IST
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mangal grah is not unluky know how

प्राय: मंगल को मंगलीक दोष का कारण बताकर बहुत अधिक बदनाम किया गया है। विवाह से संबंधित प्रकरण में जन्म लग्न से द्वादश, लग्न, चतुर्थ, सप्तम व अष्टम स्थान में स्थित होने पर मंगल दोष या

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वैधव्य दोष कहा गया है। यदि इन्हीं स्थानों पर एक अन्य पाप ग्रह यथा शनि या राहु बैठ जाएं तो उसे डबल मंगलीक या चूड़ा मंगलीक होना बताया जाता है। इसका संबंध केवल विवाह के मामले से है।
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यदि मंगल दोष के अन्य पक्ष देखे जाएं तो वह अत्यन्त उज्ज्वल हैं और किसी तरह से मंगल दोष का समीकरण इस आधार पर हो जाए कि जातक के लिए ऐसा ही जोड़ा तलाश किया जाए जिसकी कुंडली मेंभी वही दोष हो तो यह मंगल अत्यन्त असाधारण परिणाम देता है।मैंने बहुत सारी कुंडलियां देखने के बाद यह पाया कि जीवन में जो लोग महान हुए हैं या असाधारण हुए हैं उनके उत्थान के पीछे मंगल दोष का बहुत भारी योगदान है। जिसे हम मंगल दोष कहते हैं वह जीवन में उन्नति के लिए जन्मपत्रिका में उपलब्ध सबसे बड़ा गुण है।
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मैं कुछ उदाहरण देकर इस बात को कहता हूं। भगवान राम की कर्क लग्न की जन्मपत्रिका में सप्तम भाव में मंगल स्थित था। आगस्टस सीजर की कुंडली में लग्न से अष्टम भाव में मंगल था। सम्राट नीरो की कुण्डली में तुला लग्न की कुंडली में बारहवें भाव में मंगल था। गुरु नानक की सिंह लग्न की कुण्डली में चतुर्थ भाव में मंगल था। श्री चैतन्य की तुला लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में राहु था।

सम्राट अकबर की तुला लग्न की कुुंडली में चतुर्थ भाव में मंगल स्थित था। मेरी एंटोनेथ की कुंडली में लग्न में मंगल स्थित था। श्री त्यागराज की कुंडली में लग्न से बारहवें मंगल स्थित था। श्री रामकृष्ण परमहंस के कुंभ लग्न में द्वादश भाव में मंगल स्थित था। श्री बालगंगाधर तिलक के कर्क लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में मंगल स्थित था। रविन्द्रनाथ टैगोर के मीन लग्न की कुंडली में चतुर्थ भाव में राहु था। श्रीआशुतोष मुखर्जी के वृषभ लग्न में बारहवें भाव में मंगल स्थित था। महात्मा गांधी की तुला लग्न की कुंडली में ही मंगल स्थित था।

अरविन्द घोष के कर्कलग्न की कुंडली में ही मंगल स्थित था। अल्बर्ट आइंस्टीन के मिथुन लग्न की कुंडली में अष्टम भाव में मंगल स्थित था। महर्षि रमन की तुला लग्न की कुंडली में सप्तम भाव में मंगल स्थित था। मुसोलिनि की वृश्चिक लग्न की जन्म कुंडली में अष्टम भाव में राहु स्थित था। डॉ. राजेन्द्रप्रसाद की धनु लग्न की कुंडली में लग्न में ही मंगल स्थित था। श्री कस्तूरी श्रीनिवासन की वृश्चिक लग्न की कुंडली में अष्टम भाव में मंगल स्थित था।

स्वामी शिवानन्द की कर्क लग्न की कुंडली में लग्न में ही मंगल स्थित था।हिटलर की तुला लग्न की कुंडली के सप्तम भाव में मंगल स्थित था। श्रीरामकृष्ण डालमिया की मिथुन लग्न की कुंडली के द्वादश भाव में मंगल स्थित था। श्री महर बाबा के मकर लग्न की कुंडली में द्वादश भाव में मंगल स्थित था। राजा फारूख के तुला लग्न की कुंडली में ही मंगल स्थित था। यह सब उदाहरण डॉ. बी.वी. रमन की नोटेबल होरोस्कोप से लिए गए हैं।

मंगल दुस्साहस के प्रतीक हैं

जिन लोगों ने भी बहुत अधिक कर्म किया है या बड़े निर्णय किए हैं उन्हीं लोगों को समाज में बहुत अधिक ऊंचाई मिली है। जो लोग अदम्य साहस का परिचय देते हैं, हम पाएंगे कि उनमें से अधिकांश की कुंडलियों में मंगल दोष उपलब्ध है। मंगल संघर्ष क्षमता का प्रतीक है। मंगल व्यक्ति को थकने नहीं देता। मंगल हार भी नहीं मानने देता। मंगल अन्तिम जीत में विश्वास रखता है। मंगल सेनापति है जो किसी की जीत के लिए अपनी जान की बाजी लगा देता है। परन्तु मंगल पर शासन करना बहुत अधिक मुश्किल है और मंगल स्वयं शासक रहना चाहता है।

जिनके मंगल दोष है उनकी कुंडली में आप आश्चर्यजनक ढंग से अनुशासन और समयबद्ध कार्यक्रम पाएंगे। मंगल में भूख-प्यास सहने की अत्यधिक क्षमता होती है। वे लोग महत्वाकांक्षी तो होते हैं परन्तु जीवन में हर प्रकार का त्याग करने में भी सक्षमहोते हैं। उन्हें भूख-प्यास या अभाव नहीं सताते या उनके जीवनक्रम में ये अत्यन्त गौण पक्ष हैं। उन्हें यातो अनुशासन चाहिए या समयबद्ध कार्यक्रम चाहिए या संगठन क्षमता चाहिए या अन्तिम जीत चाहिए और उसकी प्रतीक्षा में बिताए जाने वाले वर्ष भी चाहिए। यह सब मिल जाए तो मंगल को कोई नहीं हरा सकता। ऐसा नहीं कि मंगल ने सिर्फ सेनापति बनाया हो। प्रसिद्ध संतों की कुंडलियों में भी यही मंगल मिलता है।

इस लेख का निष्कर्ष यह है कि पंडितों ने मंगल दोष को लेकर बहुत अधिक बदनामी की हुई है। मंगल में छुपे हुए सौंदर्य को झांकने की लोगों ने कोशिश ही नहीं की। मंगल दोष वाले व्यक्तियों के जीवन के
अन्य पक्ष जब आप देखेंगे तो आपको उनकी ऊंचाई में मंगल का सौंदर्य अवश्य नजर आ जाएगा।

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