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Predictions: क्या कहती है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुंडली, क्या बन सकते हैं देश के पीएम ?
Tue, 16 May 2023 12:08 PM IST
विनोद शुक्ला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Tue, 16 May 2023 12:08 PM IST
सार
क्या कहती है बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कुंडली, क्या बन पाएंगे देश के प्रधानमंत्री?
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bihar cm nitiesh kumar kundali
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
कर्नाटक चुनाव के परिणाम से कांग्रेस और विपक्ष बेहद उत्साहित है और आम चुनाव से पहले एक मजबूत विपक्ष की चर्चा देश में होने लगी है। यह जिम्मा बिहार के सीएम नीतीश कुमार को दिया गया है और वो इस कड़ी में हर राज्य में जाकर वहां के विपक्ष को बीजेपी के खिलाफ लामबंद करने में लगे हुए हैं। आज इस लेख में हम नीतीश कुमार की कुंडली का विश्लेषण करेंगे और यह समझने की कोशिश करेंगे की उनके सितारें क्या कह रहे हैं।
1 - मिथुन लग्न की कुंडली में बुध और भाग्येश शनि का राजयोग इस कुंडली की सबसे बड़ी खासियत है। यहां लग्नेश बुध भाग्य भाव में शनि की राशि में विराजमान हैं वही शनि भाग्येश होकर चौथे भाव में बुध की राशि में विराजमान हैं। इसी राशि परिवर्तन राजयोग के कारण एक साधारण से घर में जन्म लेकर वो बिहार के सीएम बने हैं।
2 - वाणी भाव का स्वामी चंद्रमा नीच भंग राजयोग का निर्माण कर रहा है। यहां दूसरे भाव का स्वामी शत्रु भाव में नीच है वहीं उस भाव का स्वामी दशम भाव में उच्च के शुक्र के साथ विराजमान हैं। इस योग के कारण इनके जीवन में संघर्ष के बाद सफलता मिली। जब छठे भाव का स्वामी उच्च होकर केंद्र में विराजमान होता हैं तो ऐसा जातक जीरो से हीरो बनता है।
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3 - बिहार के सीएम की कुंडली में दशम भाव का मंगल बेहद बलवान है और वो उन्हें अनुशासित बनाता है। यही कारण है कि वो अपनी नीतियों को काफी तेजी से लागू करवा पाने में सफल रहे हैं।
4 - इस कुंडली में एक कुशल प्रशासक बनने के भी योग विद्यमान है। यहां राजधर्म का कारक गुरु बुध और राहु के साथ नवम भाव में विराजमान है। ऐसा व्यक्ति न्याय के रास्ते पर चलने वाला होता है।
5 - इनकी कुंडली में गुरु केन्द्राधिपत्य दोष से पीड़ित है और सप्तम भाव का कारक है। इस भाव से राजनीति में गठबंधन देखा जाता है। इस भाव के स्वामी पर राहु केतु का प्रभाव और शनि के साथ षडाष्टक दोष होने के कारण ये कभी किसी के साथ टिककर काम नहीं कर सकते हैं।
6 - शनि और गुरु के एक दूसरे से अष्टम और छह का संबंध बनने के कारण इन्हे संबंध बिगड़ जाते है। पीएम मोदी की कुंडली में चन्द्रमा लग्न में वही इनके शत्रु भाव में विराजमान होने से दोनों अलग हुए। उसके बाद फिर आरजेडी के पास गए और फिर अलग हुए और फिर वर्तमान में उनके साथ है। हर नीच के चन्द्रमा और गुरु के कारण इनके साथ हो रहा है।
7 - वर्तमान में शनि का गोचर चौथे भाव से और राहु का गोचर छठे भाव से हो रहा है। इस समय कार्य की अधिकता होगी और इन्हे अपनी सेहत का भी ध्यान रखना होगा। अक्टूबर के बाद इनके लिए समय अनुकूल नहीं है। राहु इनकी कुंडली में इन्हे साझेदारों से अलग कर रहा है और अक्टूबर के बाद राहु का गोचर सप्तम भाव में फिर से इन्हे परेशान करेगा।
8 - वर्तमान में नीतीश कुमार सबको एक करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सप्तम और सप्तम के स्वामी पर केतु का प्रभाव ये होने नहीं देगा। भविष्य में इनके पीएम बनने की कोई भी सम्भावना नज़र नहीं आती है।
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1 - मिथुन लग्न की कुंडली में बुध और भाग्येश शनि का राजयोग इस कुंडली की सबसे बड़ी खासियत है। यहां लग्नेश बुध भाग्य भाव में शनि की राशि में विराजमान हैं वही शनि भाग्येश होकर चौथे भाव में बुध की राशि में विराजमान हैं। इसी राशि परिवर्तन राजयोग के कारण एक साधारण से घर में जन्म लेकर वो बिहार के सीएम बने हैं।
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2 - वाणी भाव का स्वामी चंद्रमा नीच भंग राजयोग का निर्माण कर रहा है। यहां दूसरे भाव का स्वामी शत्रु भाव में नीच है वहीं उस भाव का स्वामी दशम भाव में उच्च के शुक्र के साथ विराजमान हैं। इस योग के कारण इनके जीवन में संघर्ष के बाद सफलता मिली। जब छठे भाव का स्वामी उच्च होकर केंद्र में विराजमान होता हैं तो ऐसा जातक जीरो से हीरो बनता है।
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3 - बिहार के सीएम की कुंडली में दशम भाव का मंगल बेहद बलवान है और वो उन्हें अनुशासित बनाता है। यही कारण है कि वो अपनी नीतियों को काफी तेजी से लागू करवा पाने में सफल रहे हैं।
4 - इस कुंडली में एक कुशल प्रशासक बनने के भी योग विद्यमान है। यहां राजधर्म का कारक गुरु बुध और राहु के साथ नवम भाव में विराजमान है। ऐसा व्यक्ति न्याय के रास्ते पर चलने वाला होता है।
5 - इनकी कुंडली में गुरु केन्द्राधिपत्य दोष से पीड़ित है और सप्तम भाव का कारक है। इस भाव से राजनीति में गठबंधन देखा जाता है। इस भाव के स्वामी पर राहु केतु का प्रभाव और शनि के साथ षडाष्टक दोष होने के कारण ये कभी किसी के साथ टिककर काम नहीं कर सकते हैं।
6 - शनि और गुरु के एक दूसरे से अष्टम और छह का संबंध बनने के कारण इन्हे संबंध बिगड़ जाते है। पीएम मोदी की कुंडली में चन्द्रमा लग्न में वही इनके शत्रु भाव में विराजमान होने से दोनों अलग हुए। उसके बाद फिर आरजेडी के पास गए और फिर अलग हुए और फिर वर्तमान में उनके साथ है। हर नीच के चन्द्रमा और गुरु के कारण इनके साथ हो रहा है।
7 - वर्तमान में शनि का गोचर चौथे भाव से और राहु का गोचर छठे भाव से हो रहा है। इस समय कार्य की अधिकता होगी और इन्हे अपनी सेहत का भी ध्यान रखना होगा। अक्टूबर के बाद इनके लिए समय अनुकूल नहीं है। राहु इनकी कुंडली में इन्हे साझेदारों से अलग कर रहा है और अक्टूबर के बाद राहु का गोचर सप्तम भाव में फिर से इन्हे परेशान करेगा।
8 - वर्तमान में नीतीश कुमार सबको एक करने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन सप्तम और सप्तम के स्वामी पर केतु का प्रभाव ये होने नहीं देगा। भविष्य में इनके पीएम बनने की कोई भी सम्भावना नज़र नहीं आती है।
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