Kalashtami December 2021: साल की अंतिम भैरव अष्टमी, जानिए शुभ मुहूर्त महत्व और पूजा विधि
Kalashtami December 2021: इस माह की कालाष्टमी का पूजन 27 दिसंबर, दिन सोमवार को किया जाएगा। काल भैरव का पूजन प्रदोष काल में करने का विधान है। हर साल कुल 12 कालाष्टमी मनाए जाते हैं। पौष मास में पड़ने वाली यह कालाष्टमी साल की अंतिम कालाष्टमी है। आइए जानते हैं कालाष्टमी कि तिथि, महत्व और पूजन विधि।
विस्तार
कालाष्टमी तिथि
अष्टमी तिथि आरंभ: 26 दिसंबर, रविवार रात्रि 08: 08 मिनट से
अष्टमी तिथि समाप्त: 27 दिसंबर, सोमवार सायं 07: 28 मिनट पर
धार्मिक मान्यता के अनुसार कालभैरव की पूजा प्रदोषकाल में ही होती है इसलिए उदया तिथि और प्रदोष काल 27 दिसंबर को पड़ने के कारण अष्टमी तिथि 27 दिसंबर को ही मान्य होगी।
कालाष्टमी का महत्व
ऐसा माना जाता है कि भैरव अष्टमी के दिन जो भक्त पूरे विधि विधान से भैरव बाबा का स्मरण करते हैं उन्हें उनके पापों से मुक्ति मिल जाती है। मान्यता के अनुसार अष्टमी को भगवान शिव और भैरव बाबा की पूजा करने से अच्छा स्वास्थ्य, समृद्धि, सुख और सफलता भी मिलती है। यह भी माना जाता है कि भगवान काल भैरव की पूजा करने से सभी 'राहु' और 'शनि' दोषों को समाप्त किया जा सकता है।
कालाष्टमी की पूजन विधि
- जो जातक कालाष्टमी के दिन व्रत रख रहें हैं उन्हें ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान आदि करने के बाद व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
- घर के पूजास्थल में गंगाजल से छिड़काव करके कालभैरव का चित्र स्थापित करें।
- कालभैरव को गंगाजल से स्नान करने के बाद पुष्प अर्पित करें।
- भैरव बाबा का धूप, दीप से पूजन करें।
- भोग स्वरूप उन्हें नारियल, इमरती, पान, आदि चढ़ाएं।
- पूजा के दौरान भैरव चालीसा और मंत्रों का पाठ करें।
- पूजा के अंत में आरती करें और प्रसाद वितरित कर व्रत का पारण करें।