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Jyotish : कुंडली के सप्तम भाव में इन ग्रहों की अशुभता के कारण होता है पति-पत्नी में अलगाव

Thu, 21 Oct 2021 11:23 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नयी दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नयी दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Thu, 21 Oct 2021 11:23 AM IST
सार

पति पत्नी के बीच झगड़ों की यह स्थितियां कुंडली में ग्रहों के प्रभाव से उत्पन्न होती हैं। इन सब बातों का ज़िक्र फलित ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में है। आइये जानते हैं कि पति-पत्नी के बीच क्लेश किन योगों के कारण होता है-

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Inauspiciousness of these planets in the seventh house in kundali reason of separation between husband-wife
कुंडली - फोटो : kundali

विस्तार

आजकल की जीवनशैली ऐसी है कि कोई भी व्यक्ति किसी दूसरे की बात को सहन नहीं करता। फिर चाहे वो दोस्त हो, भाई बहन हो या पति-पत्नी। पति-पत्नी का रिश्ता इतनी नाज़ुक डोर से बंधा होता है कि हल्की  दरार से टूट जाता है, जैसा कि आजकल के परिवेश में हो रहा है। हमें आये दिन खबरें मिलती रहती हैं कि शादी के 6 महीने बाद या साल भर दोनों एक दूसरे से अलग हो गये या फिर उनके बीच में आये दिन झगड़ा होता रहता है।  पर क्या आप जानते हैं पति-पत्नी के बीच हो रही क्लेश के लिए कहीं न कहीं ज्योतिषीय कारण भी हैं। दरअसल पति पत्नी के बीच झगड़ों की यह स्थितियां कुंडली में ग्रहों के प्रभाव से उत्पन्न होती हैं। इन सब बातों का ज़िक्र फलित ज्योतिष के प्राचीन ग्रंथों में है। आइये जानते हैं कि पति-पत्नी के बीच क्लेश किन योगों के कारण होता है- 

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Inauspiciousness of these planets in the seventh house in kundali reason of separation between husband-wife
kundali - फोटो : facebook
  • यदि पुरुष की कुंडली लग्न में राहु एवं शनि हों तो व्यक्ति लोकापवाद से अपनी पत्नी का परित्याग कर देता हैं।
  • यदि महिला कि कुंडली में सप्तम स्थान में स्थित सूर्य पर उसके शत्रु ग्रह की दृष्टि है तो इस योग में उत्पन्न स्त्री को उसका पति छोड़ देता है।
  • फलित ज्योतिष के अनुसार जिस स्त्री की जन्म कुंडली में लग्न में मंगल या शनि की राशि में शुक्र हो  तथा सप्तम स्थान पर पाप प्रभाव हो तो ऐसी स्त्री अपने पति को छोड़कर किसी अन्य के साथ विवाह कर लेती है।
  • यदि चंद्रमा एवं शुक्र पाप ग्रहों के साथ सप्तम स्थान में हों तो पति-पत्नी गुप्त रूप से वैवाहिक संबंध तोड़ते हैं।
  • यदि निर्बल पाप ग्रह सप्तम में बैठे हों तो इस योग में उत्पन्न स्त्री को उसका पति छोड़ देता है।
  • जिसकी कुंडली में सप्तम स्थान में शुभ एवं पाप दोनों प्रकार के ग्रह हों तथा सप्तमेश या शुक्र निर्बल हो तो स्त्री एक पति को छोड़कर दूसरे के साथ विवाह कर लेती है।
  • जिस कुंडली में सप्तम स्थान में सूर्य हो तथा सप्तमेश निर्बल हो तो उस स्त्री को उसका पति छोड़ देता है।
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