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राम और बुद्ध के दांपत्य जीवन में क्यों लगी आग
राकेश झा/अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Fri, 11 Mar 2016 03:52 PM IST
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मेष राशि
- फोटो : mars
भगवान श्री राम का विवाह होते ही कुछ ही दिनों बाद उन्हें वन जाना पड़ा और रावण द्वारा सीता का हरण होने के बाद भगवान राम और सीता माता को वियोग सहना पड़ा। रावण के वध के बाद सीता और राम मिले तो एक नागरिक द्वारा उठाए गये प्रश्न के कारण भगवान राम को सीता का त्याग करना पड़ा।
इस तरह हम देखते हैं कि भगवान राम और सीता माता का दांपत्य जीवन दुःखों से भरा रहा। वास्तव में राम और सीता माता के वियोग और दांपत्य जीवन में बाधा का कारण न तो रावण था और न ही नागरिक। ये दोनों तो मात्र एक माध्यम थे। असलियत में राम और सीता का दुश्मन वही था जो महात्मा बुद्ध और उनकी पत्नी यशोधरा का शत्रु था।
कुंडली का मंगलिक दोष
राम और महात्मा बुध की कुण्डली में देखने पर ज्ञात होता है कि दोनों की ही कुण्डली में मंगलिक दोष मौजूद था। इस दोष के कारण ही दोनों को दांपत्य जीवन का पूर्ण सुख नहीं मिला। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब कुण्डली में मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें घर में होता है तो मंगलिक योग बनाता है।
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मंगल उच्च का होने पर इसका प्रभाव और तेज हो जाता है जिससे गृहस्थी में अधिक परेशानी आती है। राम की कुण्डली में मंगल विवाह के घर में यानी सातवें स्थान में बैठा है जबकि बुद्ध की कुण्डली में मंगल कुटुम्ब स्थान यानी दूसरे घर में बैठा है।
जिस व्यक्ति की कुण्डली में मंगलिक दोष होता है उनकी शादी में बाधा आती है। अगर व्यक्ति की शादी 28 वर्ष से पहले होती है तो पति-पत्नी के बीच तालमेल की कमी होती है। जीवनसाथी की सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहता है जिससे दांपत्य जीवन का सुख प्रभावित होता है। कभी-कभी यह दोष इतना अधिक प्रभाव डालने लगता है कि पति-पत्नी के बीच अलगाव की स्थिति आने लगती है।
दोष से मुक्ति का उपाय
इस योग से मुक्ति के लिए ज्योतिषशास्त्र में कई उपाय बताए गये हैं। मंगलिक व्यक्ति को सबसे पहले तो यही प्रयास करना चाहिए कि उसी व्यक्ति से शादी करें जिनकी कुण्डली में मंगलिक योग बना हुआ हुआ है। पुरूषों को विवाह से पहले तुलसी के साथ फेरे लेना चाहिए और कन्या को विष्णु भगवान की प्रतिमा अथवा केले के वृक्ष के साथ फेरे लेना चाहिए। इससे दोष शांत होता है।
मंगलिक योग में हनुमान जी की पूजा और व्रत तथा मंगलागौरी का व्रत भी उत्तम फलदायी होता है। यह भी ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की कुण्डली में मंगलिक योग प्रभावी नहीं होता है। अगर मंगल पर गुरू की दृष्टि हो या मंगल के साथ चन्द्रमा अथवा पाप ग्रह राहु बैठा हो तो मंगलिक योग का असर कम हो जाता है।
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इस तरह हम देखते हैं कि भगवान राम और सीता माता का दांपत्य जीवन दुःखों से भरा रहा। वास्तव में राम और सीता माता के वियोग और दांपत्य जीवन में बाधा का कारण न तो रावण था और न ही नागरिक। ये दोनों तो मात्र एक माध्यम थे। असलियत में राम और सीता का दुश्मन वही था जो महात्मा बुद्ध और उनकी पत्नी यशोधरा का शत्रु था।
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कुंडली का मंगलिक दोष
राम और महात्मा बुध की कुण्डली में देखने पर ज्ञात होता है कि दोनों की ही कुण्डली में मंगलिक दोष मौजूद था। इस दोष के कारण ही दोनों को दांपत्य जीवन का पूर्ण सुख नहीं मिला। ज्योतिषशास्त्र के अनुसार जब कुण्डली में मंगल पहले, दूसरे, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें घर में होता है तो मंगलिक योग बनाता है।
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मंगल उच्च का होने पर इसका प्रभाव और तेज हो जाता है जिससे गृहस्थी में अधिक परेशानी आती है। राम की कुण्डली में मंगल विवाह के घर में यानी सातवें स्थान में बैठा है जबकि बुद्ध की कुण्डली में मंगल कुटुम्ब स्थान यानी दूसरे घर में बैठा है।
जिस व्यक्ति की कुण्डली में मंगलिक दोष होता है उनकी शादी में बाधा आती है। अगर व्यक्ति की शादी 28 वर्ष से पहले होती है तो पति-पत्नी के बीच तालमेल की कमी होती है। जीवनसाथी की सेहत में उतार-चढ़ाव बना रहता है जिससे दांपत्य जीवन का सुख प्रभावित होता है। कभी-कभी यह दोष इतना अधिक प्रभाव डालने लगता है कि पति-पत्नी के बीच अलगाव की स्थिति आने लगती है।
दोष से मुक्ति का उपाय
इस योग से मुक्ति के लिए ज्योतिषशास्त्र में कई उपाय बताए गये हैं। मंगलिक व्यक्ति को सबसे पहले तो यही प्रयास करना चाहिए कि उसी व्यक्ति से शादी करें जिनकी कुण्डली में मंगलिक योग बना हुआ हुआ है। पुरूषों को विवाह से पहले तुलसी के साथ फेरे लेना चाहिए और कन्या को विष्णु भगवान की प्रतिमा अथवा केले के वृक्ष के साथ फेरे लेना चाहिए। इससे दोष शांत होता है।
मंगलिक योग में हनुमान जी की पूजा और व्रत तथा मंगलागौरी का व्रत भी उत्तम फलदायी होता है। यह भी ध्यान रखें कि हर व्यक्ति की कुण्डली में मंगलिक योग प्रभावी नहीं होता है। अगर मंगल पर गुरू की दृष्टि हो या मंगल के साथ चन्द्रमा अथवा पाप ग्रह राहु बैठा हो तो मंगलिक योग का असर कम हो जाता है।