Ganadhip Sankashti Chaturthi 2021: गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत के यह नियम अपनाएं, मिलेगा सुख समृद्धि का वरदान
मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष में आने वाली संकष्टी चतुर्थी को गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन जो भी पूरे भक्ति भाव से गणपति की आराधना करता है, उसके जीवन के समस्त समस्याओं से मुक्ति मिलती है। आइए जानते हैं गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, और व्रत के नियम के बारे में-
विस्तार
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी शुभ मुहूर्त
मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी आरंभ- 22 नवंबर 2021, सोमवार रात्रि 10: 26 मिनट से
मार्गशीर्ष मास कृष्ण पक्ष चतुर्थी समापन- 24 नवंबर 2021, बुधवार मध्य रात्रि 12: 55 मिनट पर
चंद्रोदय का समय- 23 नवंबर, मंगलवार रात्रि 08:27 मिनट
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के व्रत नियम
वैसे तो हर उपवास में सभी प्रकार के नियमों का पालन करना चाहिए और गणाधिप संकष्टी चतुर्थी में पूजा पाठ और व्रत के कुछ नियम है जो इस प्रकार हैं।
- सबसे पहले जो लोग गणाधिप संकष्टी चतुर्थी का व्रत रख रहे हैं उन्हें ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नानादि करना अनिवार्य है।
- स्नान आदि के उपरांत स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए।
- उसके बाद पूजा स्थल में जाकर व्रत का सकंल्प लेना चाहिए।
- गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के व्रत के दिन चावल, गेहूं और दाल का सेवन न करें, यह भी एक अनिवार्य नियम है।
- इस दिन व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें।
- तामसिक भोजन जैसे मांस, मदिरा का सेवन भूलकर भी न करें।
- क्रोध पर काबू रखें और खुद पर संयम बनाए रखें।
- गणाधिप संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश जी के मंत्रों के जाप के साथ श्री गणेश स्त्रोत का पाठ भी करें।
- गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण चंद्रोदय के पश्चात अर्घ्य देकर ही करें।