Dhanteras 2021: धनतेरस पर क्या कहता है आज का पंचांग, जानें खरीदारी का शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय
02 नवंबर धनतेरस के दिन राहुकाल का समय सुबह 07:55 मिनट से 09:18 मिनट तक रहेगा। वहीं दूसरी तरफ अभिजीत मुहूर्त को सभी मुहूर्त में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन अभिमुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 26 तक रहेगा।
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Aaj Ka Panchang And Dhanteras Shopping Time And Muhurat 2021: आज हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि है। हर साल इसी माह और तिथि पर धनतेरस का त्योहार मनाया जाता है। धनतेरस पांच दिनों तक चलने वाले दीपावली का पहला दिन होता है। मान्यताओं के अनुसार धनतेरस के दिन आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि समुद्र मंथन के दौरान हाथों में सोने-चांदी से भरा अमृत कलश लेकर प्रगट हुए थे। धनतेरस पर सोने-चांदी के आभूषण और बर्तन खरीदने की प्रथा वर्षों से चली आ रही है। ऐसा माना जाता है धनतेरस के दिन जो भी चीजें खरीदी जाती है साल भर उसमें 13 गुने की बढ़ोत्तरी होती है। इसके अलावा धनतेरस पर पंचांग और शुभ मुहूर्त को ध्यान में रखते हुए खरीदारी करने पर शुभ फल की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में बताया गया है कि शुभ मुहूर्त में किया गया कोई भी नया कार्य हमेशा सफल होता है। ऐसे में धनतेरस पर पंचांग की गणना को आधार बनाते हुए आइए जानते हैं कि किस समय खरीदारी और पूजा करना सबसे शुभ रहेगा...
धनतेरस पर खरीदारी का शुभ मुहूर्त( Dhanteras Shopping Time And Muhurat 2021): हिंदू कैलेंडर के अनुसार द्वादशी तिथि 11 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि आरंभ हो जाएगी।
धनतेरस त्रयोदशी तिथि प्रारंभ – 02 नवंबर 2021 को सुबह 11 बजकर 31 मिनट से
त्रयोदशी तिथि समाप्त – 03 नवंबर 2021 को 09 बजकर 02 मिनट तक
धनतेरस मुहूर्त :18:18: से 20:11 तक
अवधि :1 घंटे 52 मिनट
प्रदोष काल :17:35 से 20:11 तक
वृषभ काल :18:18 से 20:14 तक
धनतेरस के दिन राहुकाल का समय
मुहूर्त शास्त्र के अनुसार राहुकाल का समय बहुत ही अशुभ होता है। राहुकाल में कोई भी नया कार्य, खरीदारी, सौदा,पूजा और अनुष्ठान करने से बचना चाहिए। 02 नवंबर धनतेरस के दिन राहुकाल का समय सुबह 07:55 मिनट से 09:18 मिनट तक रहेगा। वहीं दूसरी तरफ अभिजीत मुहूर्त को सभी मुहूर्त में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन अभिमुहूर्त सुबह 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 26 तक रहेगा।
धनतेरस का महत्व
समुद्र मंथन से चौदह प्रमुख रत्नों की उत्पत्ति हुई जिनमें चौदहवें रत्न के रूप में स्वयं भगवान् धन्वन्तरि प्रकट हुए जो अपने हाथों में अमृत कलश लिए हुए थे। भगवान विष्णु ने इन्हें देवताओं का वैद्य और वनस्पतियों तथा औषधियों का स्वामी नियुक्त किया। इन्हीं के वरदान स्वरूप सभी वृक्षों-वनस्पतियों में रोगनाशक शक्ति का प्रादुर्भाव हुआ। भगवान धन्वन्तरि आरोग्य और औषधियों के देव हैं। धनतेरस के दिन इनकी पूजा-आराधना अपने और परिवार के स्वस्थ शरीर के लिए करें क्योंकि, संसार का सबसे बड़ा धन आरोग्य शरीर है। आयुर्वेद के अनुसार भी धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति स्वस्थ शरीर और दीर्घायु से ही संभव है।