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चंद्रदेव के जन्म से लेकर ग्रहण तक की जानें पूरी कहानी और उसके शुभ-अशुभ प्रभाव

Wed, 10 Jul 2019 07:59 AM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: Madhukar Mishra Updated Wed, 10 Jul 2019 07:59 AM IST
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Chandra Grahan July 2019 story and impact of lunar eclipse 2019
सूर्य देवता के अस्त होते ही चंद्रदेव अपना शीतल प्रकाश पृथ्वी पर बिखेरने लगते हैं। सनातन परंपरा में तमाम देवी-देवताओं की तरह चंद्रदेव भी पूज्य हैं। ज्योतिष के अनुसार मन के कारक कहलाने वाले चंद्रमा की उत्पत्ति आखिर कैसे हुई और सुहागिनों को सौभाग्यवती होने का आशीर्वाद प्रदान करने वाले चंद्रदेव का ही दर्शन आखिर उसकी होने वाले संतान के लिए क्यों कष्टकारी हो जाता है और क्या है उससे बचने का उपाय, जानने के लिए आगे की स्लाइड पर क्लिक करें — 

ऐसे हुआ चंद्रमा का जन्म

Chandra Grahan July 2019 story and impact of lunar eclipse 2019

चंद्रमा के जन्म को लेकर तमाम तरह की पौराणिक कथाओं का जिक्र मिलता है। मत्स्य एवं अग्नि पुराण में चंद्रदेव के जन्म की कथा के अनुसार एक बार जब ब्रह्मा जी ने सृष्टि रचने का विचार आया तो उन्होंने उससे पहले मानस पुत्रों की रचना की। इन्हीं मानस पुत्रों में से एक ऋषि अत्रि का विवाह ऋषि कर्दम की कन्या अनुसुइया से हुआ था। जिनसे दुर्वासा, दत्तात्रेय व सोम नाम के तीन पुत्र हुए। मान्यता है कि सोम चन्द्रदेव का ही एक नाम है और वह इन्हीं दोनों की संतान हैं। 

Chandra Grahan July 2019 story and impact of lunar eclipse 2019

चंद्रगहण को लेकर क्या कहता है धर्म और विज्ञान

धार्मिक मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब अमृत निकला तो उसे लेने के लिए देवताओं और दानवों के बीच लड़ाई होने लगी। देवताओं को मिले अमृत पर दानव भी हक जता रहे थे। इस विवाद को दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नाम की सुंदर कन्या का रूप धारण उसका बंटवारा करने की बात कही। 

जब मोहिनी के वेष में भगवान विष्णु देवताओं की पंक्ति में अमृत बांट रहे थे तो राहु नामक असुर भी उनके बीच जाकर चुपचाप बैठ गया। लेकिन इस बात की भनक भगवान सूर्यदेव और चंद्रदेव को लग गई। हालांकि तब तक देर हो चुकी थी और राहु ने अमृत प्राप्त कर लिया था, लेकिन उसी समय भगवान विष्णुने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी। 

अमृत पीने के कारण वह मरा नहीं और उसका सिर और धड़ राहु और केतु नामक छाया ग्रह के रूप में स्थापित हो गए। धार्मिक मान्यता के अनुसार राहु और केतु के कारण ही चंद्रग्रहण और सूर्य ग्रहण की घटना घटती है। 

हालांकि विज्ञान के अनुसार जब सूर्य की परिक्रमा करती हुई पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है तो चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें नहीं पहुंच पाती हैं और उस पर पृथ्वी की छाया पड़ने लगती है। जिसके कारण चांद दिखना बंद हो जाता है और यह खगोलीय घटना चंद्रग्रहण कहलाती है। 

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चंद्रग्रहण के दौरान भूलकर भी न करें ये काम 

Chandra Grahan July 2019 story and impact of lunar eclipse 2019

— धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान चंद्र दर्शन नहीं करना चाहिए। खुली आंख से तो बिल्कुल नहीं करना चाहिए। 

— चंद्रग्रहण के दौरान सबसे ज्यादा सावधानी गर्भवती महिलाओं को रखनी चाहिए। ग्रहण काल के दौरान उन्हें खुले आसमान के नीचे नहीं जाना चाहिए और न ही चंद्रग्रहण देखना चाहिए। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे उनके गर्भस्थ शिशु पर विपरीत पड़ सकता है। बल्कि चंद्रगहण से बचाव के लिए उन्हें अपने पास श्रीफल या अर्थात् एक नारियल रखना चाहिए। मान्यता है कि इस उपाय को करने से गर्भवती महिला पर वायुमंडल से निकलने वाली नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव नहीं पड़ता है। 

— चंद्रग्रहण के दौरान खाना भूलकर भी न बनाएं और न ही बने हुए खाने को गर्म करें या फिर उसे छौंक लगाएं। 

— धार्मिक मान्यता के अनुसार ग्रहण के दौरान सुई में धागा डालना, काटना-छीलना आदि भी निषेध है। 

— ग्रहण के समय पति और पत्नी को शारीरिक संबंध नहीं बनाने चाहिए। मान्यता है कि इस दौरान यदि गर्भ ठहर जाए तो होने वाली संतान विकलांग या मानसिक रूप से विक्षिप्त तक हो सकती है।

— ग्रहण के समय कोई भी शुभ व नया कार्य शुरू नहीं करना चाहिए।

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चंद्रग्रहण के दुष्प्रभाव से बचने के लिए करें ये काम 

Chandra Grahan July 2019 story and impact of lunar eclipse 2019

— चंद्रग्रहण के दौरान अपने पूज्य गुरु, ब्राह्मण, पुरोहित अथवा जरूरतमंदों को यथाशक्ति दान-दक्षिणा देने का विशेष विधान है। ग्रहण का सूतक लगने के बाद आप अनाज, पुराना पहना हुआ कपड़ा आदि निकाल कर रख लें और उसे ग्रहण के पश्चात् दान कर दें। इस उपाय को करने से चंद्रग्रहण का दोष दूर होगा और चंद्रदेव की कृपा प्राप्त होगी। 

— चंद्रग्रहण के दौरान बजाय बातचीत, तर्क-कुतर्क आदि करने के ध्यान-साधना करना अति उत्तम माना गया है। 

— चंद्रग्रहण के पश्चात् किसी पवित्र सरोवर, नदी या फिर घर में स्नान करना शुभ होता है। मान्यता है कि ग्रहण के बाद स्नान करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। 

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