बागेश्वर जिले के नुमाइशखेत मैदान में आयोजित दुर्गा पूजा, देवी पूजा और खरही में आयोजित दुर्गा पूजा महोत्सव संपन्न हो गए हैं। पूजा पंडालों में स्थापित मूर्तियों की नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई। सरयू नदी में ब्रह्मकपाली शिला के पास मूर्तियों का विसर्जन किया गया। श्रद्धालुओं ने नम आंखों से मां दुर्गा को विदाई दी। 22 सितंबर को शारदीय नवरात्र के आगाज के साथ ही नुमाइशखेत मैदान में दुर्गा और देवी पूजा का आयोजन किया जा रहा था। नवमी की रात को दुर्गा पूजा कमेटी की ओर से भंडारे और देवी पूजा की ओर से छोलिया नृत्य का आयोजन किया गया। दशमी के दिन सुबह पूजा पंडालों में विधिवत पूजा-अर्चना के बाद मूर्तियों को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया गया। देवी पूजा कमेटी ने छोलिया नृतकों के साथ जबकि दुर्गा पूजा कमेटी ने ढोल, नगाड़ों की थाप के साथ मूर्तियों को नगर भ्रमण कराया। नुमाइशखेत मैदान से दुग बाजार, माल रोड, एबीआई तिराहा, तहसील रोड तक भ्रमण कराया गया। देवी पूजा कमेटी ने वापस नुमाइशखेत की ओर से जबकि दुर्गा पूजा कमेटी ने बागनाथ मंदिर के पास वाले तट से मूर्तियों का विसर्जन किया। इसी दौरान खरही की दुर्गा पूजा कमेटी भी मूर्तियों को लेकर नगर में पहुंची। तहसील रोड से मूर्ति भ्रमण के साथ बागनाथ मंदिर के पास से ही खरही की मूर्तियों को भी विसर्जित किया गया। मूर्ति विसर्जन कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी के दोनों तटों पर एकत्र थे। लोगों ने घरों की छत से भी विदाई कार्यक्रम देखा। इस मौके पर दुर्गा पूजा कमेटी के अध्यक्ष मुकेश साह, उमेश साह, बृजकिशोर वर्मा, नवीन लोहनी, गोविंद जगाती, देवी पूजा के अध्यक्ष प्रशांत मलड़ा, राजेंद्र प्रकाश उपाध्याय, मनोज जोशी आदि मौजूद रहे।