धार्मिक नगरी काशी में एक ओर गंगा और वरुणा के बढ़े जलस्तर के चलते निचले इलाकों में रहने वाले हजारों लोग बाढ़ की चपेट में हैं, वहीं दूसरी ओर गंगा में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए राहत शिविर बनाए गए हैं। नावों के जरिए खाद्य सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम भी किया जा रहा है। इसी बीच 31 अगस्त की शाम करीब छह बजे रविदास घाट से दो बड़े क्रूज गंगा में घूमते दिखाई दिए। आरोप है कि क्रूज पर सवार कई यात्रियों ने लाइफ जैकेट नहीं पहन रखी थी। बाढ़ और तेज धारा के बीच इस तरह यात्रियों को बिना पर्याप्त सुरक्षा उपकरण के गंगा में ले जाना गंभीर लापरवाही का मामला हो सकता है। एक तरफ जल पुलिस, पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं। घाटों पर लोगों को स्नान करने और गंगा किनारे अनावश्यक रूप से रुकने से भी रोका जा रहा है। ऐसे में क्रूज संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। बाढ़ के दौरान यदि कोई बड़ा हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, यह बड़ा सवाल है। प्रशासन को क्रूज संचालन की जांच कराकर लाइफ जैकेट समेत सभी सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि किसी अनहोनी से पहले यात्रियों की सुरक्षा पुख्ता हो सके।