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सुल्तानपुर: 1983 से अब तक के घटनाक्रम की उच्चस्तरीय जांच की मांग

सुल्तानपुर: शहर के गल्ला मंडी अमेठी बाड़ा प्रकरण में नगर पालिका अध्यक्ष के आरोपों को व्यापारियों ने गलत बताते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। व्यापारियों ने शनिवार को मीडिया के सामने संयुक्त बयान जारी कर कहा कि उनका आंदोलन किसी राजनीतिक दल या व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं है। वे अपने अधिकार, रोजी-रोटी और नजूल भूमि की सुरक्षा के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। व्यापारियों के मुताबिक, गल्ला मंडी से संबंधित मामला वर्ष 1983 में उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ तक पहुंचा था। जनवरी 2020 में मामला खारिज होने के बाद दिसंबर 2020 में तत्कालीन नगर पालिका अध्यक्ष ने इसे दोबारा आगे बढ़ाया था। व्यापारियों का आरोप है कि वर्तमान अध्यक्ष के कार्यकाल में जुलाई 2025 में नगर पालिका के अधिवक्ता के न्यायालय में उपस्थित नहीं होने के कारण मामला खारिज हो गया। व्यापारियों ने दावा किया कि अदालत ने नगर पालिका को अपना पक्ष रखने के लिए नौ अवसर दिए थे, लेकिन प्रभावी पैरवी नहीं की गई। इसके बाद मार्च माह में नजूल भूमि का पट्टा रामनिवास अग्रवाल व अन्य के नाम दर्ज किया गया। व्यापारियों ने मुख्यमंत्री से वर्ष 1983 से अब तक के पूरे न्यायिक और प्रशासनिक घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी या नियुक्त अधिवक्ता की लापरवाही व अनियमितता सामने आती है, तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाय। व्यापारियों ने नजूल भूमि का पट्टा नियमविरुद्ध पाए जाने पर उसे निरस्त करने और अदम पैरवी के कारण खारिज हुए मुकदमे को न्यायालय में पुनः बहाल कराने की भी मांग की। इस दौरान रति अग्रहरि, गौरांश अग्रहरि, संदीप शुक्ल, मनीष कुमार, अभिषेक अग्रहरि, अजय जायसवाल, अमित गुप्ता, संदीप कसौधन, सूरज जायसवाल, मुन्ना लाल जायसवाल, सुमित अग्रवाल, अमित अग्रवाल, रोहित अग्रवाल और अनीश कुमार समेत दर्जनों व्यापारी व दुकानदार शामिल रहे।

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