मथुरा। भूतपूर्व सैनिक परिषद के पूर्व संस्थापक सदस्य एवं राष्ट्रीय संगठन मंत्री पवन कुमार ने संगठन के संविधान में संस्थापक पदों, वित्तीय अधिकारों और संचालन व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मसानी स्थित कृष्णा गार्डन में प्रेस वार्ता में संविधान के विभिन्न पृष्ठों का हवाला देते हुए प्रावधानों की समीक्षा की मांग की है। पवन कुमार के अनुसार, संविधान में सेवानिवृत्त सूबेदार ललित कुमार कर्मयोगी और उनकी पत्नी चंचल देवी को मूल संस्थापक व आजीवन संस्थापक बताया गया है, जबकि कैप्टन मोहरपाल सिंह, कैप्टन हरपाल सिंह, सूबेदार जीवन सिंह, सूबेदार पवन कुमार और सूबेदार महेशचंद को संस्थापक सदस्य का दर्जा दिया गया है। उन्होंने पंजीकरण के समय सिविल गवाह बनाए जाने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने रूपेश तालान को संविधान संरक्षक के रूप में दिए गए संगठनात्मक निरीक्षण, संचालन और बैंकिंग संबंधी अधिकारों तथा ललित कुमार कर्मयोगी के लिए निर्धारित सर्वोच्च वित्तीय अधिकारों के बीच संभावित विरोधाभास की ओर ध्यान दिलाया। संगठन की संपत्ति, संविधान संशोधन और विघटन संबंधी प्रावधानों पर भी उन्होंने आपत्ति जताई। पवन कुमार ने कहा कि संगठन का उद्देश्य पूर्व सैनिकों, उनके परिवारों और वीर नारियों के अधिकारों की रक्षा करना था। उन्होंने छाता क्षेत्र के किसानों और युवाओं से संगठन की व्यवस्था पर विचार करने की अपील की। उन्होंने छाता क्षेत्र में चल रहे शुगर मिल के धरने प्रदर्शन को भी एक बड़ी साजिश बताते हुए जवाहर बाग कांड की पुनरावृत्ति होने की संभावना जताई है। इसे लेकर उन्होंने छाता क्षेत्र के अवाम और किसानों से भूतपूर्व सैनिक संगठनों के नाम पर धरना प्रदर्शन कर रहे लोगों से सावधान रहने की अपील की है।