गांव की जैव विरासत दर्ज करने हेतु प्रधानों, सचिवों को प्रशिक्षण गोंडा। गांव की जैव विविधता को सहेजने के लिए 2 सितंबर 2026 को जिला ग्रामीण विकास संस्थान में प्रशिक्षण हुआ। इसमें ग्राम स्तरीय जैव विविधता प्रबंधन समितियों (बीएमसी) के 21 पंचायत सचिव और 19 ग्राम प्रधानों समेत 40 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। उन्हें पीपुल्स बायोडायवर्सिटी रजिस्टर (पीबीआर) में देसी बीज, जलस्रोत, औषधीय पौधे और पारंपरिक ज्ञान दर्ज करने की जानकारी दी गई। जिला विकास अधिकारी आदित्य तिवारी ने जैव विविधता संरक्षण को पर्यावरणीय संतुलन व सतत विकास के लिए जरूरी बताया। एनआईआरडीपीआर, हैदराबाद की सहायक प्रोफेसर वीजी नित्या ने पीबीआर की उपयोगिता समझाई। उत्तर प्रदेश जैव विविधता बोर्ड के तकनीकी अधिकारी सोमेश गुप्ता ने जैव विविधता अधिनियम और बीएमसी के दायित्वों की जानकारी दी। बीएमसी को सक्रिय रखते हुए पीबीआर तैयार करने पर जोर दिया गया।