बलरामपुर: कागजों पर भले ही विकास का पहिया तेज गति से चल रहा है, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही है। इसका अंदाजा जिले में सड़कों की दुर्दशा को देखकर आसानी से लगाया जा सकता है। फिर चाहे वह नासिरगंज-सेमरहनिया मार्ग हो या फिर राप्ती बैराज-भिनगा मार्ग। नौ वर्ष पूर्व कटी सड़क को न तो आज तक जोड़ा जा सका है और न ही सड़क की मरम्मत हो सकी है। ऐसे में 20 से अधिक गांव के लोगों को जान जोखिम में डालकर नहर की पटरी से होकर सफर तय करना पड़ रहा है। सड़कें जिले के विकास का आइना होती हैं, इस कथन को शासन प्रशासन की उदासीनता पूरी तरह से मिथ्या साबित कर रही हैं। वर्ष 2017 में बाढ़ से क्षतिग्रस्त नासिरगंज-लक्ष्मनपुर-सेमरहनिया मार्ग की आज तक मरम्मत नहीं हो सकी है। ऐसे में करीब 60 हजार की आबादी को जिला मुख्यालय भिनगा पहुंचने के लिए 13 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा है। ग्रामीणों के सामने भकला नाले की पटरी से होकर आने-जाने का जोखिम उठाने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। बारिश में नाले की पटरी पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। सड़क की बदहाली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले सप्ताह पोंदिला गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी। इस पर परिजनों को प्रसव पीड़िता को एंबुलेंस तक पहुंचाने के लिए बाइक से एंबुलेंस तक ले जाना पड़ा। महिला एंबुलेंस तक पहुंच पाती इसके पहले ही उसका प्रसव हो गया। पांच स्थानों पर कटी है सड़क जमुनहा क्षेत्र की यह सड़क बाढ़ में पांच स्थानों पर कट गई थी। इससे पोंदली, लक्ष्मनपुर, पोंदिला, सेमरहनिया, जोगिया, सुखरामपुरवा, जमशेदपुर, धोबिहा, बाबूपुरवा और संगमपुरवा समेत करीब 20 गांवों के लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जिला मुख्यालय आने-जाने के लिए ग्रामीणों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।