बहराइच में तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश और तेज हवाओं ने मिहींपुरवा तहसील क्षेत्र में हालात बिगाड़ दिए हैं। खेतों में पकने को तैयार धान की फसल तेज हवाओं के चलते जमीन पर गिर गई और लगातार बारिश के बाद पानी में डूब गई। कई खेतों में धान की फसल पानी में तैरती दिखाई दे रही है। तैयार फसल पर मौसम की मार पड़ने से किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरने का खतरा पैदा हो गया है। मिहींपुरवा क्षेत्र जंगल और नदियों से घिरा होने के कारण लगातार बारिश का असर व्यापक रूप से दिखाई दे रहा है। गांवों के निचले इलाकों में जलभराव के साथ कई प्रमुख और संपर्क मार्ग भी पानी से लबालब हो गए हैं। लाखों रुपये की लागत से बनाई गई सड़कों पर पानी भरने से सड़कें तालाब जैसी नजर आ रही हैं। जलभराव के कारण ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी हो रही है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए इन मार्गों से गुजरना खासा जोखिम भरा हो गया है। गायघाट, गुलरा, भज्जापुरवा, राजापुर कला, सर्रा, बखारी और सुजौली क्षेत्र समेत कई गांवों में धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। पकने की कगार पर पहुंची धान की फसल तेज हवा से खेतों में गिर गई। इसके बाद हुई लगातार बारिश से खेतों में पानी भर गया। किसानों का कहना है कि यदि पानी जल्द नहीं निकला तो गिरी हुई फसल के सड़ने और दाने की गुणवत्ता खराब होने का खतरा है। इससे उत्पादन पर भी सीधा असर पड़ सकता है। धान के साथ गन्ना और सब्जियों की फसल भी प्रभावित हुई है। किसानों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि बारिश ऐसे समय हुई है, जब धान की फसल पकने की ओर है। खेत में गिरी फसल को काटने में भी मुश्किल होगी। पानी में डूबी फसल यदि लंबे समय तक नहीं सूखी तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। लगातार बारिश ने किसानों की चिंता और बढ़ा दी है। फसल नुकसान की आशंका को देखते हुए किसानों ने प्रशासन से तत्काल खेतों का स्थलीय सर्वे कराने और वास्तविक क्षति का आकलन कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि राजस्व और कृषि विभाग की टीमों को गांव-गांव पहुंचकर फसलों का जायजा लेना चाहिए, ताकि नुकसान का सही आंकड़ा सामने आ सके और पात्र किसानों को नियमानुसार सहायता मिल सके। लगातार बारिश और तेज हवाओं ने किसानों को मौसम साफ होने का इंतजार करने को मजबूर कर दिया है। खेतों में पानी भरा होने के कारण किसान चाहकर भी गिरी फसल को तत्काल नहीं बचा पा रहे हैं। यदि बारिश का सिलसिला आगे भी जारी रहा तो खेतों में गिरी धान की फसल को और नुकसान होने की आशंका है।