बार-बार डायरिया से पीड़ित बच्चों पर एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग में डेढ़ साल तक शोध किया गया। जांच में बच्चों के पेट में पांच तरह के वायरस और बैक्टीरिया मिले। इससे उनका वजन और लंबाई प्रभावित मिली। इसके पीछे वजह सफाई को नजरअंदाज करना, दूषित पानी और भोजन का सेवन प्रमुख कारण सामने आए। इस शोध को इंडियन जर्नल ऑफ गेस्ट्रोएंटरोलॉजी में प्रकाशित करने के लिए भेजा जा रहा है। बाल रोग विभाग में डायरिया से पीड़ित भर्ती छह माह से पांच साल तक के 100 बच्चों पर मई 2024 से अक्तूबर 2025 तक शोध हुआ। इसमें बच्चों के मल की माइक्रोबायलॉजी विभाग में मल्टीप्लेक्स पीसीआर से जांच कराई। इसमें एडिनो-रोटा वायरस, ई-कोलाई, कैम्पिलोबैक्टर और शिगेला बैक्टीरिया मिला। इसमें बैक्टीरिया के चलते 47, वायरस से 08 फीसदी, वायरस-बैक्टीरिया से 35 और 10 फीसदी में अज्ञात कारण से बच्चे डायरिया के शिकार मिले। इनमें बैक्टीरिया में सबसे ज्यादा ई-कोलाई ताकतवर मिला। इससे 69 फीसदी और वायरस में एडिनो से 29 फीसदी में बीमारी बनी। वैक्सीन लगने से रोटा वायरस कम ही प्रभावी मिला। बच्चों की किडनी-लिवर भी प्रभावित पाया गया।