देवभूमि हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर माता रानी की भक्ति का माहौल बनने जा रहा है। शारदीय नवरात्र को लेकर मंदिरों और घरों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस वर्ष शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होंगे और 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ संपन्न होंगे। नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाएगी। हिमाचल के प्रमुख देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। मंदिरों में विशेष पूजा, हवन, भजन-कीर्तन और कन्या पूजन जैसे आयोजन किए जाएंगे। नवरात्र के पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा के साथ घटस्थापना होगी। घरों और मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापित किए जाएंगे। शिमला के गंज बाजार स्थित राधा-कृष्ण मंदिर के अनुसार, घटस्थापना के लिए सुबह 7:50 बजे से 10 बजे तक शुभ समय बताया गया है। वहीं अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक रहेगा। श्रद्धालु इस दौरान विधि-विधान से कलश स्थापना कर मां दुर्गा की आराधना कर सकेंगे। इस बार नवरात्र की शुरुआत रविवार से हो रही है। धार्मिक परंपराओं में वार के आधार पर मां दुर्गा के आगमन के वाहन की मान्यता बताई जाती है। इसी आधार पर इस वर्ष मां दुर्गा के हाथी पर आगमन की मान्यता है। धार्मिक मान्यताओं में हाथी को शक्ति, स्थिरता, समृद्धि और खुशहाली का प्रतीक माना जाता है। इसी वजह से मां दुर्गा का हाथी पर आगमन कई श्रद्धालु शुभ संकेत के रूप में देखते हैं। हालांकि, माता के वाहन से जुड़ी ये बातें धार्मिक मान्यताएं हैं, इन्हें मौसम या भविष्य की वैज्ञानिक भविष्यवाणी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इस बार नवरात्र में एक खास संयोग भी देखने को मिलेगा। 19 अक्टूबर को अष्टमी और नवमी की पूजा का विशेष अवसर रहेगा। इस दिन श्रद्धालु मां दुर्गा की विशेष आराधना करेंगे। कई घरों में कन्या पूजन और हवन का आयोजन भी किया जाएगा। मंदिरों में सुबह से ही विशेष पूजा-अर्चना शुरू होने की उम्मीद है। नवरात्र के बाद 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा। इसी के साथ शारदीय नवरात्र का समापन होगा। हिमाचल में नवरात्र के दौरान शक्तिपीठों और देवी मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं। श्रद्धालु दूर-दूर से माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में नवरात्र शुरू होने के साथ ही प्रदेश के प्रमुख मंदिरों में भी तैयारियां तेज होने लगी हैं। नवरात्र के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना की जाती है। श्रद्धालु नौ दिनों तक व्रत रखते हैं और सुबह-शाम माता की पूजा करते हैं। नवरात्र के अंतिम चरण में अष्टमी और नवमी के दिन कन्या पूजन की विशेष परंपरा है। इस बार 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले नवरात्र का समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी के साथ होगा। ऐसे में हिमाचल में अगले कुछ दिनों तक मंदिरों से लेकर बाजारों तक नवरात्र की रौनक देखने को मिलेगी।