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शिमला: पेंशनरों की लंबित देनदारियों पर संघर्ष समिति का बड़ा अभियान, 17 सूत्रीय मांगों पर सरकार को घेरा

हिमाचल प्रदेश संयुक्त संघर्ष समिति ने पेंशनरों की लंबित देनदारियों, अधिकारों और 17 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदेशभर में जनजागरण अभियान तेज कर दिया है। समिति का कहना है कि अभियान के माध्यम से पेंशनरों को उनके अधिकारों और सरकार से लंबित भुगतान की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाई जा रही है। प्रदेश अतिरिक्त महासचिव भूपराम वर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यीय समिति किन्नौर, काजा, रामपुर बुशैहर, कोटखाई, जुब्बल, रोहड़ू, छौवारा और डोडरा-क्वार के बाद शिमला पहुंची। यहां समिति ने ब्लॉक पदाधिकारियों और आम सदस्यों के साथ सीधा संवाद किया तथा नई कार्यकारिणी का गठन किया। समिति के अनुसार अभियान का उद्देश्य अधिक से अधिक पेंशनरों को संगठन से जोड़ना, पंचायत और गांव स्तर पर छोटी समितियों का गठन करना तथा उनकी समस्याओं को सामने लाना है। संगठन ने सदस्यता अभियान को भी तेज करने की बात कही है। भूपराम वर्मा ने प्रेस वार्ता में कहा कि 18 सितंबर को बिलासपुर में प्रदेश के 18 विभिन्न संगठनों की राज्य स्तरीय बैठक प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर के नेतृत्व में हुई थी। बैठक में प्रदेशभर में जनजागरण अभियान चलाने और संगठन को मजबूत करने के लिए सदस्यता अभियान तेज करने का निर्णय लिया गया था। उन्होंने कहा कि गांव और पंचायत स्तर पर छोटी-छोटी समितियां बनाकर अभियान को गति दी जा रही है। भूपराम वर्मा ने आरोप लगाया कि सरकार को पेंशनरों की 17 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपा गया है, लेकिन अभी तक समिति को वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया। उन्होंने कहा कि पिछले करीब साढ़े तीन वर्षों से सरकार देनदारियों को चरणबद्ध तरीके से निपटाने की बात कह रही है, लेकिन पेंशनरों की कई मांगें अभी लंबित हैं। समिति ने महंगाई राहत (DA) के भुगतान और छठे वेतन आयोग से संबंधित लंबित देनदारियों का भी मुद्दा उठाया। वर्मा ने दावा किया कि पेंशनरों को लाखों रुपये की देनदारियां अभी सरकार से प्राप्त होनी बाकी हैं। भूपराम वर्मा ने 14 सितंबर 2026 की वित्त विभाग की अधिसूचना का हवाला देते हुए पेंशन कम्यूटेशन से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि महालेखाकार कार्यालय में स्वीकृत मामलों के भुगतान को लेकर भी पेंशनरों में नाराजगी है। उन्होंने कहा कि लंबित मामलों को लेकर पेंशनरों में लगातार रोष बढ़ रहा है और सरकार को संगठन के साथ वार्ता कर समस्याओं का समाधान करना चाहिए। प्रेस वार्ता के दौरान भूपराम वर्मा ने संगठन से जुड़े एक अन्य नेता पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित नेता सरकार के पक्ष में बयान देकर पेंशनरों को गुमराह कर रहे हैं। वर्मा ने सुरेश ठाकुर की सदस्यता, संगठन के चुनाव और सहकारी विभाग से जुड़े विभिन्न आदेशों का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि इन मामलों को लेकर संगठन की ओर से संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपील की गई है। उन्होंने 3 अक्टूबर 2026 के आदेश को चुनौती देने की बात कही और कहा कि मामले को प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष उठाया गया है। समिति ने आरोप लगाया कि मामले में प्रक्रियागत स्तर पर कई सवाल हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्ष का पक्ष सामने नहीं आया है। भूपराम वर्मा ने आरोप लगाया कि संबंधित नेता की नजर पेंशन वेलफेयर एसोसिएशन के बैंक खाते पर है, जिसमें करीब साढ़े पांच लाख रुपये जमा हैं। उन्होंने कहा कि मामला प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के समक्ष विचाराधीन होने के कारण उन्होंने सहकारी बैंक की माल शाखा के प्रबंधक को पत्र भेजकर खाते के संचालन की अनुमति नहीं देने का आग्रह किया है। उन्होंने कहा कि संगठन इस मामले में कानूनी और संस्थागत स्तर पर अपनी लड़ाई जारी रखेगा। समिति ने कहा कि पेंशनरों में सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ रही है। भूपराम वर्मा के अनुसार पेंशनरों ने संकल्प लिया है कि जब तक 18 संगठनों की समिति को प्रदेशाध्यक्ष सुरेश ठाकुर की अध्यक्षता में वार्ता के लिए नहीं बुलाया जाता और 17 सूत्रीय मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन को और तेज किया जाएगा। प्रेस वार्ता में वरिष्ठ उपाध्यक्ष गंगा राम शर्मा, मीडिया प्रभारी सैन राम नेगी, सलाहकार बुद्धि राम जस्टा, शिमला जिला संयोजक मोहन ठाकुर, कोषाध्यक्ष सुदामा राम शर्मा, सिटी प्रधान मदन शर्मा, उपाध्यक्ष दीप राम शर्मा, कार्यालय सचिव रमेश ठाकुर समेत कई पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।

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