अजमेर और नागौर जिले की सीमा पर स्थित खुंडियावास में रविवार को भादवा माह की दूज यानी बाबा रामदेव जी के जन्मदिवस के अवसर पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। सुबह से ही बाबा रामदेव जी के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग गईं। दूर-दराज के गांवों के साथ राजस्थान के विभिन्न जिलों और दूसरे राज्यों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा रामदेव जी के दरबार में शीश नवाकर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। पूरे मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में दिनभर मेले जैसा माहौल बना रहा था।
पंचामृत अभिषेक के बाद बाबा का विशेष श्रृंगार
रामदेव जयंती के अवसर पर मंदिर में सुबह विशेष पूजा-अर्चना की गई। बाबा रामदेव जी का विधिवत पंचामृत से अभिषेक किया गया। इसके बाद बाबा को विशेष पोशाक धारण कराकर आकर्षक श्रृंगार किया गया। पूजा के बाद श्रद्धालुओं के लिए दर्शन शुरू हुए तो मंदिर परिसर में भक्तों की भीड़ बढ़ती चली गई। मंदिर को आकर्षक रोशनी और सजावट से सजाया गया था और बाबा के जयकारों से परिसर गूंजता रहा।
दो जिलों की सीमा पर बना आस्था का अनोखा केंद्र
खुंडियावास का बाबा रामदेव जी मंदिर अपनी भौगोलिक स्थिति के कारण भी खास पहचान रखता है। मंदिर का आगे का हिस्सा नागौर जिले में, जबकि पिछला हिस्सा अजमेर जिले की सीमा में आता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, बाबा के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था के कारण खुंडियावास को लंबे समय से ‘मिनी रामदेवरा’ कहा जाता है।
भक्त की भक्ति से जुड़ी है धाम की मान्यता
स्थानीय मान्यता के अनुसार खुंडियावास का यह धाम एक भक्त की अटूट श्रद्धा से जुड़ा है। मान्यता है कि बाबा रामदेव जी के प्रति उसकी गहरी आस्था के कारण यह स्थान धीरे-धीरे धार्मिक केंद्र बन गया। भादवा की दूज से दशमी तक यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।
कई राज्यों से पहुंचते हैं श्रद्धालु
मंदिर से जुड़े बढ़सिया के पूर्व सरपंच शंकरलाल के अनुसार मेले में राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, गुजरात, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश से भी श्रद्धालु पहुंचते हैं। रामदेवरा जाने वाले कई पैदल यात्री खुंडियावास में दर्शन कर अपनी यात्रा आगे बढ़ाते हैं।
भीड़ को देखते हुए पुलिस और समिति ने व्यवस्था संभाली
मेले में भीड़ को देखते हुए मंदिर समिति के कार्यकर्ताओं ने कतार और दर्शन व्यवस्था संभाली। पुलिस का जाब्ता भी तैनात रहा। मंदिर परिसर में सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की गई। भादवा की दूज पर उमड़ी भीड़ ने खुंडियावास की धार्मिक पहचान को एक बार फिर सामने ला दिया।