फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति पर पंजाब सरकार का विरोध

पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस के रूप में जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति को लेकर पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार और केंद्र के बीच टकराव के संकेत मिले हैं। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने जालंधर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि इसमें संबंधित राज्य सरकार की राय और सहमति लेने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। हालिया घटनाक्रम में केंद्र सरकार ने 5 सितंबर 2026 को जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्ति अधिसूचित की। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने 6 अगस्त को उनके नाम की सिफारिश की थी। जस्टिस मिश्रा जून 2026 से हाईकोर्ट के कार्यवाहक चीफ जस्टिस के तौर पर कार्यरत थे। चीमा के बयान के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने रविवार को शाम 4 बजे कैबिनेट की आपात बैठक बुलाई है। बैठक में नियुक्ति की प्रक्रिया और राज्य सरकार की भूमिका को लेकर चर्चा किए जाने की बात कही गई है। हरपाल चीमा ने कहा कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस की नियुक्ति संवेदनशील संवैधानिक मामला है। उनके अनुसार, नियुक्ति प्रक्रिया में संबंधित राज्य सरकार के व्यू और सहमति को लेकर निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा की नियुक्ति के मामले में इस प्रक्रिया को नजरअंदाज किया गया। चीमा ने इसे पंजाब और पंजाबियों की अनदेखी से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर सवाल उठाए। वित्त मंत्री ने जस्टिस जी.एस. संधावालिया की नियुक्ति का उदाहरण देते हुए केंद्र और मध्य प्रदेश की तत्कालीन भाजपा सरकार की भूमिका पर सवाल उठाया। चीमा के अनुसार, 11 जुलाई 2024 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस जी.एस. संधावालिया को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का चीफ जस्टिस नियुक्त करने की सिफारिश की थी। बाद में सितंबर 2024 में कॉलेजियम ने उनकी नियुक्ति हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में करने की सिफारिश की। उपलब्ध न्यायिक रिपोर्टों के मुताबिक, जुलाई की सिफारिश के बाद कॉलेजियम ने सितंबर में अपनी सिफारिश बदल दी थी। चीमा ने दावा किया कि मध्य प्रदेश में उनकी नियुक्ति को दो महीने से अधिक समय तक मंजूरी नहीं दी गई और इसी तुलना के आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार की मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल उठाया।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें