नशीली दवाओं की गैरकानूनी बिक्री के खिलाफ कार्रवाई करने वाली अधिकारी डॉ. नेहा शौरी के बुजुर्ग माता-पिता को अपनी बेटी के कत्ल के मामले में इंसाफ की आस लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मिलने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। वर्ष 2019 से बेटी के कत्ल की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे माता-पिता को मुलाकात का अवसर नहीं मिल सका। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर पुराने मामलों में इंसाफ के लिए संघर्ष कर रहे परिवारों की पीड़ा को सामने ला दिया है। डॉ. नेहा शौरी के पिता कैप्टन कैलाश कुमार शौरी भारतीय सेना के सेवानिवृत्त अधिकारी और वर्ष 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के पूर्व सैनिक हैं, जबकि उनकी माता अरुण शौरी सेवानिवृत्त अध्यापिका हैं। 29 मार्च 2019 को खरड़ स्थित अपने कार्यालय में डॉ. नेहा शौरी की गोलियां मारकर हत्या कर दी गई थी। वह पंजाब के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में जोनल ड्रग लाइसेंसिंग अथॉरिटी के पद पर तैनात थीं। नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के बाद हुई थी हत्या डॉ. नेहा शौरी ने अपने कार्यकाल के दौरान नशीली दवाओं की गैरकानूनी बिक्री के खिलाफ कार्रवाई की थी। उनके कत्ल के मामले में बलविंदर सिंह नामक केमिस्ट का नाम सामने आया था, जिसने घटना के बाद खुद को भी गोली मार ली थी। पुलिस ने जांच के बाद मामले में क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी थी, लेकिन परिवार जांच से संतुष्ट नहीं हुआ। परिवार लगातार मामले की निष्पक्ष जांच और इसे सीबीआई को सौंपने की मांग करता आ रहा है। इसी सिलसिले में परिजन पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। सात साल से इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे माता-पिता को अब भी मामले की जांच को लेकर कई उम्मीदें हैं। झोटा के परिवार के साथ दुख साझा करने पहुंची थीं अरुण शौरी परविंदर सिंह झोटा की मौत के बाद डॉ. नेहा शौरी के माता-पिता का पुराना दर्द एक बार फिर ताजा हो गया। बीते दिनों अरुण शौरी मानसा के तीनकोनी में चल रहे धरने में शामिल हुई थीं और उन्होंने झोटा के परिवार के साथ दुख साझा किया था। इस दौरान उन्होंने नशों के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई और झोटा मामले की जांच सीबीआई से करवाने की मांग केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष रखने की अपील की थी। बुधवार को जब अमित शाह झोटा के परिवार के साथ दुख साझा करने के लिए मानसा पहुंचे तो डॉ. नेहा शौरी के माता-पिता भी उनसे मिलने की उम्मीद लेकर वहां पहुंचे। हालांकि, पुलिस ने उन्हें आगे जाने की अनुमति नहीं दी, जिसके कारण उनकी गृह मंत्री से मुलाकात नहीं हो सकी। उन्हें रोके जाने के कारणों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया। दोनों परिवारों के मुखिया पूर्व सैनिक, इंसाफ के लिए संघर्ष जारी इस पूरे घटनाक्रम का भावनात्मक पहलू यह है कि परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह फौजी और डॉ. नेहा शौरी के पिता कैप्टन कैलाश कुमार शौरी, दोनों पूर्व सैनिक हैं। दोनों परिवारों ने देश की सेवा की, लेकिन आज अपने बच्चों की मौत के बाद इंसाफ के लिए संघर्ष कर रहे हैं। एक परिवार सात साल से अपनी बेटी की हत्या की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, जबकि दूसरा परिवार अपने बेटे की मौत के मामले में इंसाफ की उम्मीद लगाए बैठा है। अरुण शौरी पहले भी धरने के दौरान भावुक होते हुए कह चुकी हैं कि माता-पिता के लिए अपने जवान बेटे-बेटियों की अर्थियों को कंधा देना सबसे बड़ा दुख है। उन्होंने नशों के खिलाफ सामूहिक लड़ाई और इस संघर्ष में जुटे लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जरूरत पर भी जोर दिया था। डॉ. नेहा शौरी के माता-पिता को गृह मंत्री से मिलने का अवसर नहीं मिलना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है कि लंबे समय से इंसाफ की मांग कर रहे पीड़ित परिवारों की आवाज सरकार के शीर्ष स्तर तक पहुंचाने के लिए प्रभावी व्यवस्था कितनी जरूरी है। दोनों परिवारों का संघर्ष नशों के खिलाफ कार्रवाई करने वालों की सुरक्षा और आपराधिक मामलों में निष्पक्ष जांच की मांग को भी सामने लाता है।