पंजाब की राजनीति एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ी है, जहां मुकाबला केवल राजनीतिक दलों के बीच नहीं, बल्कि पुरानी सियासी विरासत और नए चेहरों के बीच भी दिखाई दे रहा है। 2022 के विधानसभा चुनाव ने पंजाब की राजनीति में ऐसा भूचाल ला दिया था, जिसमें दशकों से सत्ता और संगठन पर प्रभाव रखने वाले बड़े-बड़े राजनीतिक परिवारों के दिग्गज चुनाव हार गए और ऐसे चेहरे विधानसभा पहुंच गए, जिन्हें चुनाव से कुछ समय पहले तक राज्य की राजनीति में बहुत कम लोग जानते थे। आम आदमी पार्टी ने 117 में से 92 सीटें जीतकर कांग्रेस, अकाली दल और भाजपा समेत स्थापित राजनीतिक ताकतों को करारा झटका दिया। कांग्रेस 77 से घटकर 18 सीटों पर आ गई, जबकि शिरोमणि अकाली दल महज तीन सीटों तक सिमट गया। 2022 में पंजाब ने जिन राजनीतिक दिग्गजों को बाहर का रास्ता दिखाया, उनमें पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल, अकाली दल अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल, बिक्रम सिंह मजीठिया, तत्कालीन मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, नवजोत सिंह सिद्धू और कई अन्य बड़े नाम शामिल थे। चन्नी को चमकौर साहिब और भदौर दोनों सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, जबकि सुखबीर बादल अपनी पारंपरिक जलालाबाद सीट भी नहीं बचा सके।