फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

एमपी: कभी अपराध के लिए जेल पहुंचे हाथ अब बचाएंगे बेजुबानों की जान, 8 रुपये में तैयार हो रही रेडियम रिफ्लेक्टर

Thu, 08 Oct 2026 05:01 PM IST
नर्मदापुरम ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम

कभी अपराध की वजह से सलाखों के पीछे पहुंचे हाथ अब बेजुबान पशुओं की जिंदगी बचाने में जुटे हैं। नर्मदापुरम सेंट्रल जेल के बंदी सड़क पर घूमने वाले निराश्रित पशुओं को रात के अंधेरे में वाहन दुर्घटनाओं से बचाने के लिए रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट तैयार कर रहे हैं। खास बात यह है कि इन बेल्टों को बनाने में जेल से निकलने वाली अनुपयोगी सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। रसोईघर की पॉलीथिन, पुराने कंबल और कपड़ों के टुकड़ों को उपयोगी बनाकर पशुओं के लिए सुरक्षा कवच तैयार किया जा रहा है। प्रदेश में पहली बार ऐसा प्रयोग
जेल प्रबंधन के अनुसार, मध्यप्रदेश में यह अपनी तरह का पहला प्रयोग है, जिसमें बंदियों द्वारा निराश्रित पशुओं की सुरक्षा के लिए रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट तैयार की जा रही हैं। प्रबंधन ने इसे बड़े स्तर पर ले जाने की तैयारी की है। नर्मदापुरम सेंट्रल जेल में निराश्रित पशुओं के लिए 5 हजार रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। रात में हेडलाइट पड़ते ही चमकेगी बेल्ट
शहर की सड़कों पर बैठे या घूमते पशु रात के समय वाहन चालकों को आसानी से नजर नहीं आते। अचानक सामने आने पर दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। इसी समस्या को देखते हुए तैयार की जा रही बेल्ट में रेडियम रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे हैं। वाहन की हेडलाइट पड़ते ही रिफ्लेक्टर चमकेंगे और दूर से ही पशु की मौजूदगी का संकेत देंगे। इससे चालक को समय रहते वाहन की रफ्तार नियंत्रित करने या दिशा बदलने में मदद मिल सकती है। कचरे से तैयार हो रही सुरक्षा बेल्ट
बंदियों ने पुराने कंबल और कपड़ों के टुकड़ों से मजबूत रस्सी तैयार की है। स्थानीय स्तर पर इसे ‘गिरमा’ कहा जाता है। इसी रस्सी के आधार पर रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट बनाई जा रही है। बेल्ट पर रिफ्लेक्टर इस तरह लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि अलग-अलग दिशाओं से आने वाले वाहनों की रोशनी पड़ने पर पशु दिखाई दे सके। महज 8 रुपये में तैयार हो रही बेल्ट
जेल प्रबंधन के मुताबिक, एक रेडियम रिफ्लेक्टर बेल्ट तैयार करने में करीब 8 रुपये की लागत आ रही है। बंदी प्रतिदिन कई घंटे इस काम में जुटे हैं। प्रबंधन की ओर से उन्हें जरूरी सामग्री उपलब्ध कराने के साथ सामूहिक रूप से बैठकर बेल्ट बनाने के लिए स्थान भी दिया गया है।

पढे़ं: इंडिगो 24 अक्तूबर से बंद करेगी जबलपुर-इंदौर फ्लाइट, चैंबर ने जताई चिंता; जानें क्यों लिया गया फैसला हर महीने 500 बेल्ट बनाने का लक्ष्य
इस अभियान को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा रहा है। बंदियों के लिए हर महीने करीब 500 बेल्ट तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इस तरह 5 हजार बेल्ट तैयार होने के बाद इन्हें शहर और आसपास के क्षेत्रों में निराश्रित पशुओं तक पहुंचाया जाएगा। खुली जेल के बंदी पहनाएंगे बेल्ट
तैयार बेल्टों को पशुओं तक पहुंचाने में खुली जेल के बंदियों की मदद ली जाएगी। शहर की सीमा में काम करने वाले खुले जेल के बंदी सड़कों पर घूमने वाले निराश्रित पशुओं को चिन्हित कर उन्हें बेल्ट पहनाने में सहयोग करेंगे। इसके अलावा बेल्ट के वितरण और अभियान को व्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए यातायात पुलिस की मदद लेने की भी योजना है। जेल की चारदीवारी में बदल रही सोच
जेल प्रशासन के लिए यह पहल केवल पशुओं की सुरक्षा का अभियान नहीं है। बंदियों को समाजोपयोगी गतिविधियों से जोड़ना भी इसका अहम उद्देश्य है। प्रबंधन का कहना है कि जेल में बंदियों को लगातार सकारात्मक कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाता है, ताकि सजा पूरी करने के बाद वे दोबारा गलत रास्ते पर न जाएं। गाय और खेती के अनुभव का भी इस्तेमाल
बंदियों का गाय और कृषि से जुड़ा पारंपरिक अनुभव भी इस प्रयोग में काम आ रहा है। उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय तरीके से पशुओं की जरूरत को समझते हुए बेल्ट तैयार की जा रही हैं। रेडियम रिफ्लेक्टर को 360 डिग्री विजिबिलिटी देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है, ताकि रात में वाहन चालकों को पशु अधिक आसानी से नजर आ सकें।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें