फसलों के दाम, बढ़ती लागत और जमीन अधिग्रहण के मुद्दे को लेकर बुधवार को खरगोन में किसानों ने बड़ा प्रदर्शन किया। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के आह्वान पर जिलेभर से किसान कृषि उपज मंडी में जुटे। यहां हुई किसान महासभा के बाद किसानों ने ट्रैक्टर और वाहनों के साथ शहर में रैली निकाली। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव कुमार कक्का ट्रैक्टर पर सवार होकर रैली में शामिल हुए। करीब तीन किलोमीटर लंबी रैली कलेक्टोरेट पहुंची, जहां किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर चार अलग-अलग ज्ञापन सौंपे।
किसानों की प्रमुख मांगों में देशगांव-जुलवानिया फोरलेन के लिए अधिग्रहित की जा रही जमीन का मुआवजा गाइडलाइन के चार गुना दिए जाने की मांग प्रमुख रही। महासंघ ने मांग पूरी नहीं होने की स्थिति में दूध, सब्जी, फल और अनाज की आपूर्ति रोककर आंदोलन करने की चेतावनी भी दी। कृषि उपज मंडी में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए शिव कुमार कक्का ने फसलों के मूल्य और सरकारी योजनाओं को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का मूल्य लागत के आधार पर मिलना चाहिए। महासंघ ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार सी-2 प्लस 50 प्रतिशत के आधार पर फसलों का मूल्य तय करने और उसी आधार पर खरीदी की मांग उठाई।
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उन्होंने मिर्च को सब्जी के बजाय मसाला फसल की श्रेणी में शामिल करने की मांग भी रखी। वहीं प्रदेश संगठन महामंत्री गोपाल पाटीदार ने किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। महासभा में राष्ट्रीय मंत्री रविदत्त, प्रदेश अध्यक्ष शोभाराम, प्रदेश महामंत्री घनश्याम पटेल, मालवा-निमाड़ प्रांत अध्यक्ष रामेश्वर गुर्जर सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया। किसानों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और कलेक्टर के नाम अलग-अलग मांगों वाले ज्ञापन सौंपे।
मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन में सभी फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीदी, 20 सितंबर से कपास व मक्का खरीदी शुरू करने, नकली खाद-कीटनाशक की जांच के लिए तहसील स्तर पर प्रयोगशाला खोलने और असमय बारिश व कीट-व्याधि से प्रभावित फसलों का मुआवजा देने की मांग की गई। जिला स्तर पर सीसीआई से कपास खरीदी जल्द शुरू करने, कपास की गुणवत्ता रेशे के आधार पर तय करने, मंडियों में राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय बाजार भाव प्रदर्शित करने वाली स्क्रीन लगाने और बड़ा तौल कांटा जल्द स्थापित करने की मांग रखी गई। इसके अलावा किसानों ने खरगोन में स्वीकृत मेडिकल कॉलेज का निर्माण एम्स की तर्ज पर कराने, बंद औद्योगिक इकाइयों के स्थान पर फसल आधारित उद्योग स्थापित करने और खेती-किसानी से जुड़े युवाओं के लिए गांव स्तर पर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई।