लखनऊ विश्वविद्यालय के शिक्षाशास्त्र विभाग की ओर से बुधवार को ‘जिज्ञासा यज्ञ’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में प्रश्न पूछने और जिज्ञासा को बढ़ावा देते हुए उसे शोध व नवाचार से जोड़ने की संस्कृति विकसित करना था। संकायाध्यक्ष श्रवण कुमार ने कहा कि प्रश्नशीलता ज्ञान विस्तार की पहली सीढ़ी है। उन्होंने विद्यार्थियों को जिज्ञासु दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। विभाग की समन्वयक अपर्णा गोडबोले ने कहा कि हर खोज की शुरुआत एक प्रश्न से होती है। चीफ प्रोवोस्ट आशीष अवस्थी ने कहा कि जिज्ञासु विद्यार्थी नए विचारों के वाहक बनते हैं। अतिरिक्त प्रोवोस्ट महेंद्र अग्निहोत्री और कार्यक्रम समन्वयक हेमेंद्र कुमार सिंह ने भी जिज्ञासा को शोध से जोड़ने पर जोर दिया। कार्यक्रम में ‘जिज्ञासा की शक्ति’ विषय पर नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत कर ‘प्रश्न कमजोरी नहीं, सीखने की शक्ति है’ का संदेश दिया गया।