आद्य शंकराचार्य से जुड़ी भारत की आध्यात्मिक परंपरा में श्रृंगेरी का विशिष्ट स्थान है। मान्यता है कि शंकराचार्य ने यहां पर्याप्त समय व्यतीत किया और शारदा पीठम की स्थापना की। उन्होंने अपने शिष्य सुरेश्वराचार्य को इस पीठ का दायित्व सौंपा था। कालांतर में यह पीठ अद्वैत वेदांत, वैदिक विद्वत्ता और आध्यात्मिक शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हुआ और पूरे विश्व में सनातन धर्म के बड़े केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हुआ।
भारत स्वस्तिक यात्रा के तीसरे दिन सोमवार को संत मोरारी बापू श्रृंगेरी के श्री शारदा पीठ पहुंचे। यहां उन्होंने शारदा पीठम जाकर जगद्गुरु शंकराचार्य भारती तीर्थ महासन्निधानम् से मुलाकात की। आध्यात्मिक क्षेत्र की दोनों महान विभूतियों के बीच हुई इस मुलाकात में कई विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।