दिल्ली के जंतर-मंतर पर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी के प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस अलर्ट मोड में है। पुलिस के खुफिया विभाग को प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने का इनपुट मिला है। पुलिस के मुताबिक, सीजेपी और आम आदमी पार्टी के बीच कथित तौर पर समन्वय और छात्रों को प्रदर्शन से जोड़ने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, ये पुलिस के खुफिया इनपुट और दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
खुफिया इनपुट के मुताबिक, सीजेपी और आप से जुड़े समर्थक दिल्ली विश्वविद्यालय समेत राजधानी के दूसरे कॉलेज और विश्वविद्यालयों के छात्रों के बीच पहुंच रहे हैं। दावा है कि छात्रों को 10 अक्टूबर के प्रदर्शन में शामिल होने के लिए संपर्क किया जा रहा है। पुलिस को आशंका है कि अगर बड़ी संख्या में छात्र और समर्थक जंतर-मंतर पहुंचते हैं, तो प्रदर्शन का आकार काफी बड़ा हो सकता है।
दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी के मुताबिक, गुरुवार और शुक्रवार तक छात्रों के बीच दो लाख से ज्यादा पोस्टर बांटे जाने की योजना से जुड़े इनपुट मिले हैं। गुरुवार को कुछ इलाकों में पोस्टर बांटे जाने की जानकारी भी पुलिस को मिली है। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।
पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदर्शन में भीड़ को नियंत्रित करने के साथ-साथ सोशल मीडिया के जरिए लोगों को जुटाने और किसी भी तरह की अफवाह को फैलने से रोकने की है। हाल के दिनों में देश की राजधानी में युवाओं और छात्रों से जुड़े प्रदर्शनों में सोशल मीडिया की भूमिका काफी अहम रही है। यही वजह है कि इस बार दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से पहले ही डिजिटल गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है।
प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सभी जिलों में साइबर थानों के सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल को सक्रिय कर दिया है। इन सेल को अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रही गतिविधियों की निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। पुलिस की नजर उन अकाउंट्स पर भी है, जिनके जरिए प्रदर्शन को लेकर ज्यादा से ज्यादा लोगों तक संदेश पहुंचाने की कोशिश की जा रही है।
पुलिस ने साइबर थानों को सोशल मीडिया हैंडल की रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए हैं। हर साइबर थाना पुलिस को करीब 10 से 15 सोशल मीडिया हैंडल की रिपोर्ट तैयार कर दिल्ली पुलिस मुख्यालय को भेजने को कहा गया है। इस रिपोर्ट में संदिग्ध गतिविधियों, भ्रामक सूचनाओं और फर्जी अकाउंट्स से जुड़ी जानकारी शामिल करने के निर्देश हैं।
इसके अलावा पुलिस फर्जी सोशल मीडिया हैंडल की पहचान करने और फर्जी वीडियो या भ्रामक कंटेंट के जरिए लोगों के बीच भ्रम फैलाने की कोशिशों का भी पता लगाने में जुटी है। पुलिस मुख्यालय को भेजी जाने वाली रिपोर्ट के जरिए यह देखा जाएगा कि प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर किस तरह का नैरेटिव बनाया जा रहा है और किन माध्यमों से लोगों को प्रदर्शन में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
दरअसल, सीजेपी का नाम उस आंदोलन के संदर्भ में सामने आया है, जिसमें बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दों को उठाया जा रहा है। ऐसे में पुलिस को आशंका है कि विश्वविद्यालय और कॉलेजों के छात्र इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल हो सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो जंतर-मंतर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ राजधानी के दूसरे संवेदनशील इलाकों में भी पुलिस की तैनाती बढ़ाई जा सकती है।
दिल्ली पुलिस फिलहाल सोशल मीडिया मॉनिटरिंग से लेकर जमीनी स्तर तक तैयारियों को मजबूत कर रही है। पुलिस की कोशिश है कि प्रदर्शन से पहले ही भीड़ जुटाने की गतिविधियों और संभावित अफवाहों की पहचान कर ली जाए।
अब बड़ा सवाल यही है कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर सीजेपी का प्रदर्शन कितना बड़ा होगा? क्या इसमें बड़ी संख्या में दिल्ली विश्वविद्यालय और दूसरे संस्थानों के छात्र पहुंचेंगे? और क्या सोशल मीडिया के जरिए तैयार किया जा रहा नेटवर्क राजधानी की सड़कों पर बड़े प्रदर्शन में तब्दील होगा? इन सवालों के जवाब 10 अक्टूबर को प्रदर्शन के दौरान ही सामने आएंगे।