फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

टमाटर के दाम और जमीन के मुद्दे पर सोलन में किसानों का प्रदर्शन, डीसी कार्यालय के बाहर उठाई मांगों की आवाज

किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर हिमाचल किसान सभा ने शुक्रवार, 18 सितंबर को जिला उपायुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद किसान सभा की ओर से मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में टमाटर उत्पादकों समेत अन्य किसानों से जुड़े कई मुद्दे उठाए गए। किसानों ने टमाटर के लिए ऐसा न्यूनतम खरीद मूल्य तय करने की मांग की, जो उत्पादन की वास्तविक लागत से कम से कम 50 फीसदी अधिक हो। किसान सभा ने कहा कि जब बाजार में टमाटर के दाम गिरें तो किसानों को नुकसान से बचाने के लिए सरकारी खरीद व्यवस्था लागू की जानी चाहिए। टमाटर की कीमतों को लेकर किसानों की चिंता हाल के दिनों में भी सामने आई है। सितंबर में सोलन क्षेत्र के किसानों ने कम मंडी भाव और बढ़ती उत्पादन लागत को लेकर परेशानी जताई थी। किसानों ने सोलन में टमाटर प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि इससे टमाटर की फसल का बेहतर उपयोग और मूल्य संवर्धन संभव हो सकेगा। इसके साथ ही जल्दी खराब होने वाली कृषि उपज के लिए शीत भंडारण की व्यवस्था करने की मांग की गई। किसानों ने मंडियों में पारदर्शी नीलामी और उपज का भुगतान समय पर सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। ज्ञापन में किसानों ने केंद्र सरकार से मुक्त व्यापार समझौतों पर नियंत्रण लगाने की अपील की। किसान सभा का कहना है कि सस्ते आयात से घरेलू बाजार में स्थानीय कृषि उत्पादों के दाम प्रभावित हो सकते हैं। किसान सभा ने हिमाचल प्रदेश टेनेंसी एवं लैंड रिफॉर्म्स एक्ट, 1972 की धारा 118 को उसके मूल स्वरूप में बनाए रखने की मांग भी रखी है। हिमाचल प्रदेश सरकार के आधिकारिक दस्तावेज के अनुसार धारा 118 गैर-कृषक के पक्ष में भूमि हस्तांतरण पर प्रतिबंध से संबंधित है। राज्य सरकार ने धारा 118 और उससे जुड़े नियमों के लिए अलग compendium भी जारी किया है। किसान सभा के ब्लॉक सचिव नीतीश ठाकुर ने कहा कि सोलन जिला टमाटर उत्पादन का प्रमुख क्षेत्र है और किसानों को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा है। वहीं किसान सभा, सोलन के अध्यक्ष मनोहर मेहता ने धारा 118 को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि उनके अनुसार इसमें कमजोरी से छोटे किसानों की भूमि पर दबाव बढ़ सकता है। किसानों ने ज्ञापन के माध्यम से कृषि उपज के बेहतर दाम, बाजार सुरक्षा, भंडारण और प्रसंस्करण सुविधाओं के साथ भूमि संबंधी मौजूदा संरक्षण को लेकर अपनी मांगें सरकार के सामने रखीं।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें