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सिरमौर: पंचकर्म से मरीजों को राहत का अनुभव, 89 आयुष संस्थानों से मिल रहीं सेवाएं

घुटनों के दर्द से परेशान नाहन के रंजीत सिंह ने जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में पंचकर्म उपचार करवाया तो उन्हें इसके बाद आराम और शरीर में हल्कापन महसूस हुआ। वहीं सिरदर्द और चक्कर की समस्या के चलते शिरोधारा करवाने वाली सुनीधि अग्रवाल ने भी उपचार के दूसरे दिन सिरदर्द में कुछ अंतर आने की बात कही। ये मरीजों के व्यक्तिगत अनुभव हैं। सिरमौर में ऐसे उपचार के लिए आयुष विभाग के 89 संस्थानों के माध्यम से सेवाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं। जिले में 72 आयुष्मान आरोग्य संस्थान, 15 आयुर्वेदिक स्वास्थ्य केंद्र और दो आयुर्वेदिक अस्पताल हैं। संबंधित संस्थानों में उपलब्ध सुविधाओं के अनुसार लोगों को आयुर्वेदिक उपचार और पंचकर्म की चयनित प्रक्रियाएं दी जा रही हैं। जिला आयुष अस्पताल नाहन के वरिष्ठ चिकित्सक विशेषज्ञ, बीएएमएस एमडी पंचकर्म डॉ. नरेश चौहान ने बताया कि पंचकर्म आयुर्वेद की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है। इसके तहत शिरोधारा, जानु बस्ती, ग्रीवा बस्ती, कटि बस्ती, नस्य कर्म, स्नेहन और स्वेदन जैसी प्रक्रियाएं की जाती हैं। इनका चयन मरीज की स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार किया जाता है। आयुष विभाग की पहल के तहत पच्छाद क्षेत्र के क्वाकधार गांव की लवली और नाहन क्षेत्र के बनेठी की कृतिका पुंडीर व गौंत की स्नेहा ठाकुर एक वर्षीय पंचकर्म टेक्नीशियन कोर्स कर रही हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें पंचकर्म प्रक्रियाओं का व्यावहारिक ज्ञान हासिल करने और आयुष सेवाओं से जुड़े क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं तलाशने का अवसर मिल रहा है। प्रशिक्षुओं ने बताया कि पाठ्यक्रम से उन्हें नया कौशल सीखने और व्यावसायिक क्षेत्र में आगे बढ़ने का अवसर मिला है। पंचकर्म सहित किसी भी प्रक्रिया को अपनाने से पहले योग्य चिकित्सक से परामर्श और उपचार के दौरान उचित चिकित्सकीय निगरानी जरूरी है।

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