नेरचौक स्थित मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्स के माध्यम से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों को नौकरी से हटाए जाने के विरोध में कर्मचारियों ने मेडिकल कॉलेज के मुख्य गेट के बाहर धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने प्रशासन, अस्पताल प्रबंधन और प्रदेश सरकार से हटाए गए सभी कर्मचारियों को दोबारा सेवा में लेने की मांग उठाई है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि कुछ दिन पहले नौकरी से हटाए गए आउटसोर्स कर्मचारियों में से एक कर्मचारी ने कथित तौर पर आत्महत्या का प्रयास किया था। इस घटना के बाद कर्मचारियों में रोष और बढ़ गया है। कर्मचारियों ने कहा कि वे करीब सात वर्षों से सेवाएं दे रहे थे, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अचानक बिना किसी नोटिस के नौकरी से बाहर कर दिया गया। कर्मचारियों के अनुसार, नौकरी जाने के बाद उनके सामने परिवार का पालन-पोषण करने को लेकर आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। आउटसोर्स व्यवस्था पर भी उठे सवाल धरने में जिला परिषद सदस्य बहल वार्ड अनिल सैनी भी कर्मचारियों के समर्थन में पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों का समर्थन करते हुए आउटसोर्स व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए। अनिल सैनी ने आरोप लगाया कि आउटसोर्स कंपनी के माध्यम से स्थानीय युवाओं को अपेक्षित संख्या में रोजगार नहीं मिल रहा है और कर्मचारियों को कम वेतन में काम करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को करीब 11 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। इसी राशि से उन्हें किराया, परिवार का खर्च, बच्चों की पढ़ाई और अन्य जरूरतें पूरी करनी पड़ती हैं। अनिल सैनी ने आरोप लगाया कि दूसरी ओर आउटसोर्स कंपनी सरकार से कर्मचारियों की सेवाओं के एवज में इससे अधिक राशि प्राप्त करती है। उन्होंने आउटसोर्स व्यवस्था में कथित अनियमितताओं और धांधली की जांच की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि पूरे मामले को गंभीरता से लिया जाएगा और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर उचित कार्रवाई के लिए आवाज उठाई जाएगी। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द उनकी नौकरी बहाली नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।