हिमाचल किसान सभा लोकल कमेटी बालीचौकी का सम्मेलन शुक्रवार को संपन्न हुआ। सम्मेलन का उद्घाटन किसान सभा राज्य कमेटी के उपाध्यक्ष नारायण चौहान ने किया। उन्होंने कहा कि किसान सभा आजादी से पहले से किसानों की जमीन और अधिकारों की लड़ाई लड़ती आ रही है। वर्तमान समय में भी किसान सभा किसानों की मांगों को लेकर संघर्ष करने वाला प्रमुख संगठन है। नारायण चौहान ने कहा कि केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के कारण कृषि क्षेत्र गंभीर संकट से गुजर रहा है। कृषि सब्सिडी में कटौती, विकास के नाम पर जमीन अधिग्रहण और खेती की बढ़ती लागत से किसानों के लिए खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने के वादे से पीछे हट रही है। उन्होंने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों का प्रतिकूल असर देश के किसानों पर पड़ रहा है। गन्ना, सेब, तिलहन और दलहन उत्पादकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रदेश में दूध उत्पादकों और बागवानों की समस्याओं का भी समाधान नहीं हो रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि क्षेत्र में आढ़तियों और व्यापारियों के पास बागवानों के करोड़ों रुपये फंसे हुए हैं, जिससे किसान और बागवान आर्थिक परेशानी झेल रहे हैं। सम्मेलन को किसान सभा राज्य कमेटी के सदस्य महेंद्र राणा ने भी संबोधित किया। इस दौरान स्मार्ट मीटर के विरोध और मनरेगा को बचाने के लिए सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किए गए। सम्मेलन में संगठन को मजबूत करने और किसानों-बागवानों की समस्याओं को लेकर आंदोलन तेज करने पर भी चर्चा हुई। सम्मेलन के दौरान 13 सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया। इसमें हीरालाल को अध्यक्ष, इंदर सिंह को सचिव और केहर सिंह को कोषाध्यक्ष चुना गया। अंत में किसानों और बागवानों की मांगों को लेकर क्षेत्र में संघर्ष तेज करने का निर्णय लिया गया।