वर्ष 2025 की आपदा ने मंडी के टारना निवासी ममता देवी के सपनों के घर को मलबे में बदल दिया। दो मंजिला मकान क्षतिग्रस्त हुआ तो परिवार को किराये के कमरे में शरण लेनी पड़ी, लेकिन यह मुश्किल ममता के हौसले को नहीं तोड़ पाई। उन्होंने अपने हाथ के हुनर को ही सहारा बनाया। पारंपरिक सिड्डू के कारोबार के दम पर वह न सिर्फ परिवार का पालन-पोषण कर रही हैं, बल्कि आत्मनिर्भरता की राह पर भी आगे बढ़ रही हैं। ममता देवी वर्ष 2017 से सिड्डू बनाने और बेचने का कारोबार कर रही हैं। उनके परिवार में पति और तीन बेटियां हैं। पति भी कारोबार में उनका हाथ बंटाते हैं। एक बेटी की पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्होंने उसकी शादी करवाई, जबकि दो बेटियां अभी पढ़ाई कर रही हैं। ममता बताती हैं कि सिड्डू के कारोबार से उन्हें अच्छी आमदनी हुई।