पूर्व मंत्री एवं भाजपा नेता गोविंद सिंह ठाकुर ने कांग्रेस सरकार पर हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड को समाप्त करने की दिशा में काम करने का आरोप लगाया है। जिला मुख्यालय कुल्लू में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश में राजीव गांधी डे-बोर्डिंग स्कूल खोलने और सरकारी स्कूलों में अंग्रेजी माध्यम शुरू करने की बात कही थी, लेकिन सरकार के चार साल पूरे होने के बाद भी दोनों मोर्चों पर अपेक्षित काम नहीं हुआ है। गोविंद सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार ने डे-बोर्डिंग स्कूल खोलने और अंग्रेजी माध्यम शुरू करने के बजाय प्रदेश के बेहतर प्रदर्शन करने वाले कुछ स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने या सीबीएसई पैटर्न में बदलने का रास्ता अपनाया है। उनके मुताबिक इससे हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अस्तित्व और उसकी भूमिका को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि यदि प्रदेश में सीबीएसई शिक्षा व्यवस्था का विस्तार करना था तो अलग से नए स्कूल स्थापित किए जाने चाहिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले से संचालित स्कूलों को ही सीबीएसई में बदल दिया गया और इनमें पर्याप्त सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं करवाई गई हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत केंद्र सरकार की ओर से शिक्षा क्षेत्र के लिए धन उपलब्ध करवाया जा रहा है, लेकिन आरोप लगाया कि प्रदेश में इन पैसों का उचित उपयोग नहीं हो रहा है। उन्होंने सरकार से शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों और योजनाओं को लेकर जवाब मांगा। गोविंद सिंह ठाकुर ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री किसी की बात नहीं सुनते और उनके कथन तथा कार्यों में अंतर दिखाई देता है। पूर्व मंत्री ने दावा किया कि इससे सरकार के भीतर मंत्री और विधायक भी संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को लेकर भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा कि कभी कांगड़ा को नेतृत्व देने की बात कही जाती है तो कभी कुल्लू और लाहौल को प्रतिनिधित्व देने की चर्चा होती है। वहीं, वीरभद्र सिंह के नाम पर अलग राजनीतिक पार्टी बनने की चर्चाओं को लेकर पूछे गए सवाल पर गोविंद सिंह ठाकुर ने कहा कि वीरभद्र सिंह प्रदेश के बड़े नेता रहे हैं और छह बार मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने कहा कि उनके परिवार की ओर से पार्टी बनाने का फैसला उनका निजी विषय है। गोविंद सिंह ठाकुर के इन बयानों के बाद प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था, स्कूलों को सीबीएसई से जोड़ने और हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड की भूमिका को लेकर राजनीतिक बहस फिर तेज होने के संकेत हैं।