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कांगड़ा: जदरांगल केंद्रीय विश्वविद्यालय परिसर के लिए 30 करोड़ जारी करने की मांग, AAP ने दी आंदोलन की चेतावनी

हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय के धर्मशाला-जदरांगल परिसर के निर्माण का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आम आदमी पार्टी जिला कांगड़ा ने प्रदेश सरकार से परिसर के लिए लंबित राशि जारी करने और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की है। पार्टी के जिला अध्यक्ष देश राज की अध्यक्षता में पार्टी कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री के नाम उपायुक्त कांगड़ा के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। इसमें जदरांगल में प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय के स्थायी परिसर से जुड़ी लंबित औपचारिकताओं को शीघ्र पूरा करने की मांग की गई है। ज्ञापन में आम आदमी पार्टी ने कहा कि केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना वर्ष 2009 में हुई थी, लेकिन स्थायी परिसर का निर्माण पूरा नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय की गतिविधियां अलग-अलग अस्थायी परिसरों से संचालित होती रही हैं। विश्वविद्यालय की अपनी 2024-25 वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, जदरांगल में उत्तरी परिसर के लिए करीब 57.10 हेक्टेयर अतिरिक्त वन भूमि के लिए Stage-I वन मंजूरी मिल चुकी थी। हालांकि Stage-II मंजूरी की प्रक्रिया के लिए प्रतिपूरक वनीकरण, भूमि के शुद्ध वर्तमान मूल्य आदि से जुड़ी करीब 30 करोड़ रुपये की राशि जमा होना लंबित बताया गया था। बाद में इस राशि को लेकर समीक्षा भी हुई। फरवरी 2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार समीक्षा के बाद यह राशि करीब 27 करोड़ रुपये आंकी गई थी। आम आदमी पार्टी का कहना है कि राशि जारी होने में देरी के कारण जदरांगल परिसर से जुड़ी भूमि हस्तांतरण प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। पार्टी ने सरकार से तत्काल आवश्यक राशि जारी करवाने और वन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय का स्थायी परिसर बनने से क्षेत्र में उच्च शिक्षा के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा विकसित होगा और छात्रों को लंबे समय से चली आ रही अस्थायी परिसरों की व्यवस्था से राहत मिल सकेगी। ज्ञापन के माध्यम से पार्टी ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मांग पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। पार्टी ने जरूरत पड़ने पर भूख हड़ताल करने की भी चेतावनी दी है। गौरतलब है कि जदरांगल परिसर के लिए वन भूमि और करीब 30 करोड़ रुपये की राशि का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से लगातार उठता रहा है। विश्वविद्यालय की वार्षिक रिपोर्ट भी बताती है कि Stage-II वन मंजूरी से जुड़ी वित्तीय औपचारिकताएं परिसर निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण लंबित प्रक्रिया रही हैं।

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