पिता देशराज कभी ढाबे पर काम करके परिवार का पेट पालते थे, लेकिन स्वास्थ्य बिगड़ने के कारण अब उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं है। घर की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि खेल का अभ्यास जारी रखना और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना भी चुनौती बन गया। इसके बावजूद बेटी ने हार नहीं मानी। तमाम मुश्किलों को पीछे छोड़ते हुए प्रिया ठाकुर ने पहले ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता और अब नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। कांगड़ा जिले के मेहसी गांव की प्रिया की यह सफलता सिर्फ एक पदक की कहानी नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में अपने सपनों को जिंदा रखने के संघर्ष की मिसाल है। परिवार की आर्थिक तंगी के कारण प्रिया के लिए खेल की राह आसान नहीं रही। पिता की सेहत खराब होने से घर में कमाई का कोई साधन नहीं बचा। ऐसे में राष्ट्रीय स्तर पर पहुंचने के लिए जरूरी अभ्यास, डाइट और प्रतियोगिताओं में भाग लेने का खर्च जुटाना बड़ी चुनौती थी। प्रिया को स्कूली स्तर से प्रशिक्षण दे रहे टीजीटी अनिल शर्मा ने जब उसकी प्रतिभा और परिवार की आर्थिक स्थिति से मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को अवगत करवाया, तो उसे आर्थिक मदद मिली। इस सहायता से प्रिया को अभ्यास जारी रखने और प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने में सहारा मिला। हालांकि, इस सफलता के पीछे उसकी लगातार मेहनत, अनुशासन और मुश्किलों के आगे न झुकने का जज्बा भी अहम रहा। प्रिया ने जनवरी 2026 में ऑल इंडिया इंटर यूनिवर्सिटी चैंपियनशिप में 400 मीटर दौड़ में स्वर्ण पदक जीतकर हिमाचल का नाम रोशन किया था। इस उपलब्धि के बाद उसने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान और मजबूत करने का लक्ष्य रखा। आठ से 11 अक्तूबर तक नई दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में आयोजित नेशनल ओपन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में प्रिया ने 400 मीटर दौड़ 53.56 सेकंड में पूरी कर कांस्य पदक अपने नाम किया। मुकाबला बेहद कड़ा रहा। स्वर्ण पदक विजेता ने 53.37 सेकंड और रजत पदक विजेता ने 53.55 सेकंड में दौड़ पूरी की। प्रिया महज 0.01 सेकंड के अंतर से रजत पदक से चूक गई। इस प्रदर्शन के साथ प्रिया ने देश की शीर्ष धाविकाओं के बीच अपनी जगह बनाई है। सीमित संसाधनों के बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन करना उसकी मेहनत और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। प्रिया का अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में देश के लिए पदक जीतना और ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना है। आर्थिक तंगी के बीच राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने वाली प्रिया की कामयाबी उन प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के लिए भी उम्मीद की मिसाल है, जिनके सपनों के रास्ते में संसाधनों की कमी खड़ी होती है। प्रिया के अनुसार, आर्थिक मदद और हौसलाअफजाई से उसे अपना अभ्यास जारी रखने में काफी सहारा मिला है। अब उसकी नजरें आने वाली प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने और अपने बड़े लक्ष्य को हासिल करने पर हैं।