रामलीला मैदान बड़ा में सोमवार को गणेश वंदना के साथ रामलीला का शुभारंभ हुआ। पहले दिन नारद मोह के प्रसंग का मंचन आकर्षण का केंद्र रहा। निर्देशक राजीव शर्मा के निर्देशन में कलाकारों ने नारद मुनि के अहंकार और भगवान विष्णु की लीला को मंच पर जीवंत किया। दर्शकों ने मंचन का आनंद लिया। रामलीला के मंचन में दिखाया गया कि नारद मुनि कठोर तपस्या में लीन थे। उनकी तपस्या से चिंतित देवराज इंद्र ने कामदेव को उनकी तपस्या भंग करने के लिए भेजा, लेकिन कामदेव अपने प्रयास में सफल नहीं हो सके। इसके बाद नारद मुनि के मन में अहंकार उत्पन्न हो गया। वह अपनी उपलब्धि का बखान करते हुए भगवान शिव और भगवान विष्णु के पास पहुंचे। नारद मुनि का अहंकार दूर करने के लिए भगवान विष्णु ने लीला रची। अंततः नारद मुनि को अपनी भूल का एहसास हुआ। कलाकारों ने नारद मोह प्रसंग के माध्यम से संदेश दिया कि अहंकार व्यक्ति की समझ पर पर्दा डाल देता है। धार्मिक प्रसंगों और पात्रों के माध्यम से कलाकारों ने दर्शकों को भक्ति, विनम्रता और आत्मबोध का संदेश दिया। रामलीला के आयोजक श्रीराम क्लब बड़ा के सचिव सुखदेव पटियाल और क्लब के सदस्यों ने क्षेत्रवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर रामलीला देखने की अपील की है।