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किशाऊ बांध परियोजना पर छह राज्यों में सहमति, केंद्र उठाएगा जल घटक की 90% लागत: अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर साधा निशाना

किशाऊ बहुउद्देश्यीय बांध परियोजना को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध अब समाप्त होने की दिशा में बढ़ गया है। 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने परियोजना संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत केंद्र सरकार परियोजना के जल घटक की लगभग 90 प्रतिशत लागत वहन करेगी। शेष 10 प्रतिशत वित्तीय भार छह सहभागी राज्यों के बीच साझा किया जाएगा। केंद्र सरकार ने किशाऊ परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना के रूप में आगे बढ़ाने की बात कही है। परियोजना का उद्देश्य यमुना बेसिन में जल उपलब्धता बढ़ाना, सिंचाई व्यवस्था को मजबूत करना, पेयजल आपूर्ति में सुधार और स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन करना है। समझौते के बाद सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कांग्रेस पर राजनीतिक निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछले छह दशकों में देश और प्रदेश में कांग्रेस की कई सरकारें आईं और चली गईं, लेकिन किशाऊ बांध परियोजना से जुड़ी समस्या बनी रही। उनके अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जलशक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर परियोजना के समाधान का रास्ता तैयार किया। भाजपा नेता ने यह भी कहा कि परियोजना के लिए केंद्र सरकार 90 प्रतिशत खर्च उठाने जा रही है, जबकि शेष वित्तीय जिम्मेदारी सहभागी राज्यों द्वारा साझा की जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी टिप्पणी की कि छह राज्यों में से पांच राज्य भाजपा शासित हैं, लेकिन हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री को परियोजना का श्रेय लेने की कोशिश करने वाले नेता के रूप में प्रस्तुत करना दुर्भाग्यपूर्ण है। हालांकि, आधिकारिक जानकारी के अनुसार समझौते में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू समेत सभी छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों की भागीदारी रही। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने परियोजना को सभी सहभागी राज्यों के लिए लाभकारी बताया है। आधिकारिक विवरण के मुताबिक टोंस नदी पर बनने वाले बांध की ऊंचाई 232.6 मीटर होगी। परियोजना में 1,562 मिलियन घन मीटर जल भंडारण की क्षमता, करीब 97,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का प्रावधान बताया गया है। किशाऊ परियोजना का मुद्दा कई दशकों से लागत साझेदारी, जल बंटवारे और राज्यों के बीच सहमति न बनने के कारण अटका हुआ था। जून 2026 में केंद्र की पहल पर छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद समझौते का रास्ता साफ हुआ था। अब समझौते के बाद परियोजना को आगे की मंजूरी के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष रखा जाना है।

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