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धर्मशाला: तिब्बती लोकतंत्र के 66 साल पूरे, दलाई लामा के योगदान को किया याद

तिब्बती लोकतंत्र की स्थापना के 66 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में बुधवार को मैक्लोडगंजस्थित मुख्य बौद्ध मंदिर में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में तिब्बती लोकतांत्रिक व्यवस्था के विकास और इसमें परम पावन दलाई लामा के योगदान को याद किया गया। इस दौरान निर्वासित तिब्बती सरकार की ओर से मेधावी बच्चों और शोधकर्ताओं को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में तिब्बती कलाकारों और बच्चों ने नृत्य प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में रंग जमाया। बच्चों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मौजूद लोगों का मन मोह लिया। कार्यक्रम के माध्यम से तिब्बती संस्कृति, परंपरा और लोकतांत्रिक मूल्यों को आगे बढ़ाने का संदेश दिया गया। केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के सिक्योंग पेंपा त्सेरिंग ने कहा कि तिब्बती लोकतंत्र परम पावन दलाई लामा की दूरदर्शिता और उनके लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का परिणाम है। उन्होंने कहा कि निर्वासन में लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखना और आने वाली पीढ़ियों तक इसके मूल्यों को पहुंचाना सभी तिब्बतियों की जिम्मेदारी है। निर्वासित तिब्बती संसद के अनुसार 2 सितंबर 1960 को पहली तिब्बती जनप्रतिनिधि सभा के गठन के साथ तिब्बती लोकतांत्रिक सरकार की औपचारिक शुरुआत हुई थी। इसके बाद 1991 में निर्वासित तिब्बती प्रशासन को लिखित संविधान आधारित आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्था में बदला गया। वर्ष 2001 से राष्ट्रपति (सिक्योंग) का प्रत्यक्ष चुनाव शुरू हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने लोकतंत्र, आपसी सम्मान, सहनशीलता और कानून के शासन को मजबूत करने पर जोर दिया। निर्वासित तिब्बती संसद ने भारत सरकार और भारतीय जनता के सहयोग के लिए आभार जताते हुए दलाई लामा के दीर्घायु और तिब्बत के मुद्दे के न्यायपूर्ण समाधान की कामना की।

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