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50 फीसदी धान कटाई पूरी, अब पराली जलाने की घटनाएं बढ़ने की आशंका

गोहाना। क्षेत्र में धान की कटाई का कार्य 50 फीसदी पूरा हो गया है। कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों में आग लगाने की घटनाएं बढ़ने की संभावना भी बढ़ गई हैं। फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए कृषि अधिकारियों ने भी सतर्कता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने कर्मचारियों को खेतों में गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। साथ ही खेतों में बचे हुए अवशेषों का प्रबंधन होने तक लगातार निगरानी बनाए रखने के भी निर्देश दिए हैं। क्षेत्र में धान की कटाई का कार्य चला हुआ है। अधिकांश किसान धान की कटाई मशीनों से करवा रहे हैं। मशीनों से कटाई के बाद एक से दो फीट तक अवशेष बच जाते हैं। कुछ किसान बचे हुए अवशेषों में आग लगा देते हैं। इससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ता है। सरकार ने खेतों में फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। सरकार के प्रतिबंध के बावजूद भी किसान खेतों में अवशेषों में आग लगा देते हैं। बीते वर्ष क्षेत्र में फसल अवशेष जलाने की 68 घटनाएं हुई थी। इस बार फसल अवशेष जलाने की घटनाओं को न्यूनतम करने के लिए अधिकारियों ने कमर कसी हुई है। कृषि अधिकारी और कर्मचारी गांवों में लगातार सभाएं कर किसानों को फसल अवशेष जलाने के दुष्प्रभावों के बारे में बता रहे हैं। इसके साथ ही खेतों में भी निगरानी कर रहे हैं। अधिकारी निगरानी का कार्य कर्मचारियों के साथ-साथ ड्रोन से भी करवा रहे हैं। एसडीओ डॉ. राजेंद्र मेहरा का कहना है कि खेतों में फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। कर्मचारियों को भी गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए हैं, ताकि कोई किसान फसल अवशेषों में आग न लगाए। फसल अवशेष जलाते हुए पकड़े जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही किसान को विभागीय योजनाओं के लाभ भी नहीं मिलेंगे।

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