करीब डेढ़ साल पहले प्रदेश में पहली बार स्थाई रूप से अस्तित्व में आई हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी में गुटबाजी व खींचतान गहराती ही जा रही है। इसी के चलते आज तक कमेटी न कोई बजट पास कर पाई है और न हीं कोई ठोस निर्णय लेकर सिरे चढ़ा सकी है। ऐसे में अब कमेटी प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा से इस्तीफे की मांग की जाने लगी है। यहां तक कि कमेटी में मचे घमासान के बीच गत सोमवार से अंबाला से कमेटी सदस्य गुरतेज सिंह पंजोखरा विभिन्न सवालों को लेकर कमेटी मुख्यालय पर धरने पर उतरे हुए हैं तो उनके साथ दादूवाल गुट भी खुलकर समर्थन में हैं। वरिष्ठ नेता दीदार सिंह नलवी से लेकर दर्जन भर से अधिक सदस्य व पूर्व सदस्य भी समर्थन देने के साथ धरने पर भी बैठे हैं तो वहीं हर कोई प्रधान झींडा को निशाने पर लिए हुए हैं। झींडा द्वारा डेढ़ साल के दौरान किए गए दावों व कार्यों पर श्वेत पत्र के साथ अब उनके इस्तीफे की मांग की जाने लगी है। ऐसे में यह विवाद और भी गहराने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। धक्का प्रधान है झींडा, किसी सदस्य को शुरू से ही स्वीकार नहीं : नलवी कमेटी सदस्य दीदार सिंह नलवी का कहना है कि जगदीश सिंह झींडा धक्का प्रधान है। उनके लिए कोई नियम, कायदा व कानून मान्य नहीं है। इनका प्रधान बनना ही सही नहीं था। वे आज तक गुरुद्वारा वाइज बजट ही नहीं बना पाए। यहां तक कि तीन गुरुद्वारे ही इनके अनुसार गायब है। इनके कार्य में कोई पारदर्शिता नहीं है। चार बार वहीं बजट को लेकर दावा करते रहे। नलवी ने दावा किया कि 90 फीसदी सदस्य अब इस धरने के समर्थन में है और समय पर वे यहां भी दिखाई देंगे। धरने के जरिए संगत को बताया जा रहा है कि झींडा ने आज तक क्या किया है। न बजट बना पाए हैं न आडिट की संस्था तैयार कर पाए हैं। जिस प्रधान ने तीन गुरुद्वारा ही रिकार्ड अनुसार गुम कर दिए, उसे कैसे स्वीकार किया जा सकता है।