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झज्जर के सीआईएसएफ सब इंस्पेक्टर सैनप्रकाश और पत्नी का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार

झज्जर। दिल्ली संसद भवन में सीआईएसएफ सब इंस्पेक्टर के पद पर तैनात सैनप्रकाश का रविवार को सैनिक सम्मान के साथ अंतिम संस्कार रेवाड़ी रोड स्थित शमशान घाट में किया गया। इंस्पेक्टर सैनप्रकाश और उनकी पत्नी लक्ष्मी का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार किया गया। उनको मुखाग्नि छोटे बेटे प्रीतम ने दी। इससे पहले दिल्ली से आई सीआईएसएफ की टुकड़ी ने उनको सलामी दी। टीम के सदस्यों ने परिवार के सदस्यों को तिरंगा झंडा सौंपा। उनके अंतिम संस्कार में काफी संख्या में शहर के सामाजिक, धार्मिक लोगों ने भाग लेकर उनको श्रद्धांजलि दी। यहां बता दें कि शनिवार शाम करीब 6 बजे झज्जर-गुरुग्राम रोड पर पेलपा गांव के पास एंबुलेंस आगे चल रहे ट्राले से टकरा गई थी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एम्बुलेंस का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। उसमें रहणिया कालोनी निवासी सैनप्रकाश, उनकी पत्नी लक्ष्मी देवी, बेटा पंकज और सीताराम गेट निवासी ड्राइवर प्रमोद सवार थे। प्रमोद की मौके पर ही मौत हो गई जबकि सैनप्रकाश, लक्ष्मी देवी और पंकज को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया। उपचार के दौरान सैनप्रकाश और लक्ष्मी देवी की मौत हो गई थी, जबकि पंकज घायल है। रविवार को पीजीआई रोहतक में सैनप्रकाश और लक्ष्मी देवी के शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। उसके बाद शवों को घर पर लाया गया, जहां परिवार ने अंतिम रस्में पूरी की। परिवार, रिश्तेदारों और सीआईएसएफ ने सैनप्रकाश को श्रद्धांजलि दी। यहां से सैन्य सम्मान के साथ शव को शमशान घाट ले जाया गया, जहां छोटे बेटे प्रीतम ने मुखाग्नि दी। वहीं एंबुलेंस चालक प्रमोद का भी पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। उनका भी अंतिम संस्कार रविवार को हुआ। प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचे, जताई नाराजगी सीआईएसएफ के सब इंस्पेक्टर के अंतिम संस्कार में कोई भी प्रशासनिक अधिकारी नहीं पहुंचा। इसके अलावा स्थानीय विधायक या अन्य कोई नेता भी नहीं आया। इस पर स्थानीय पार्षद व लोगों ने नाराजगी जताई। पार्षद नरेश कुमार ने कहा कि सब इंस्पेक्टर सैनप्रकाश के अंतिम संस्कार में किसी प्रशासनिक अधिकारी का न आना उनकी लापरवाही दर्शाता है। किसी न किसी अधिकारी को आना चाहिए था। लोगों का कहना था कि देश की सेवा में तैनात रहे जवान की अंतिम विदाई के मौके पर प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी अपेक्षित थी। अधिकारियों के मौके पर नहीं पहुंचने को लेकर लोगों ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। लोगों ने कहा कि जवान ने अपनी सेवा के दौरान देश की सुरक्षा में योगदान दिया और ऐसे समय में प्रशासन की उपस्थिति परिवार और क्षेत्र के लोगों के लिए कई सवाल छोड़ गई।

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